फोटो नंबर-31पानी भर जाने के बाद ऐतिहासिक स्मारक जलमहल पर भ्रमण करते लोग। संवाद
नारनौल। कभी सूखा पड़ा और उदास सा दिखने वाला जलमहल अब अपने असली रंग में लौट आया है। महीनों बाद जब इसमें पानी भरा गया, तो जैसे इस ऐतिहासिक स्मारक की पूरी कहानी ही बदल गई। इसकी खूबसूरती देखने के लिए हर महीने करीब ढाई हजार लोग यहां पहुंच रहे हैं। जबकि इससे पहले पूरे दिन में सिर्फ 20-25 पर्यटक ही यहां आते थे।
शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने का काम अब धीरे-धीरे रंग दिखाने लगा है। नारनौल में मौजूद करीब 14 ऐतिहासिक स्मारकों में से कई का जीर्णोद्धार तेजी से चल रहा है। इससे आने वाले समय में यहां ऐतिहासिक पर्यटन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
जलमहल में पानी आने के बाद अब दूसरे शहरों से भी लोग यहां खिंचे चले आ रहे हैं। हालांकि कोरोना के बाद विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी जरूर आई है जबकि पहले कई विदेशी सैलानी जलमहल की स्थापत्य कला को देखकर इसकी तुलना ताजमहल से भी करते थे।
शहर की बाकी धरोहरों को भी नया रूप देने का काम जारी है। चोर गुंबद का जीर्णोद्धार पूरा हो चुका है जबकि राय बालमुकुंद दास का मकबरा (बीरबल का छत्ता), इब्राहिम सूरी का मकबरा और अलीजान की बावड़ी पर तेजी से काम चल रहा है।
महर्षि च्यवन की तपोस्थली पर रोपवे का कार्य शुरू
शहर से सात किलोमीटर दूर स्थित ढोसी धाम को भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां करीब 57 करोड़ रुपये की लागत से रोपवे बनाया जा रहा है, जिसे 2027 की दीवाली तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बनने से ऐतिहासिक स्मारकों के साथ-साथ यह पर्वत भी सैलानियों को अपनी ओर खींचेगा।