महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन को आदर्श रेलवे स्टेशन का दर्जा मिलने के बाद भी यहां पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। प्लेटफॉर्म नंबर दो पर पानी, शौचालय और टिन शेड की सुविधा तक नहीं है। दिव्यांगों को चढ़ने व उतरने के लिए रैंप की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा पांच साल पहले बनाया गया स्टेशन भवन का प्लास्टर उतरने लगा है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सामाजिक संगठनों द्वारा रेलवे के उच्च अधिकारियों को बार-बार मांग करने के बाद भी रेलवे स्टेशन पर समस्या खत्म नहीं हो रही।
महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन को 2006 में आदर्श स्टेशन का दर्जा दिया गया था। आदर्श स्टेशन का दर्जा कागजों में ही चलता रहा, लेकिन यात्रियों की सुविधाएं नहीं बढ़ाई गईं। वर्ष 2018 में लगभग 30 लाख रुपये से रेलवे का नया भवन, वेटिंग हॉल, शौचालय आदि बनाए गए थे, लेकिन सुविधा तो तब भी नहीं दी गई। आज आधी-अधूरी सेवाओं के बल पर ही कागजों में महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन आदर्श स्टेशन के नाम पर चल रहा है।
पांच वर्ष पहले बनाए गए भवन का उतरने लगा प्लास्टर
पांच वर्ष पहले 2018 में रेलवे स्टेशन का पुराना भवन तोड़कर नया भवन बनाया गया था। इस पर 30 लाख रुपये खर्च किए गए थे। 24 जनवरी 2018 को जयपुर मंडल के जीएम टीपी सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। उद्घाटन के एक वर्ष बाद ही भवन का प्लास्टर उतरने लग गया था। निर्माण के दौरान यहां के लोगों ने इसमें हलकी सामग्री का प्रयोग किए जाने का मुद्दा भी उठाया था और रेलवे अधिकारियों को शिकायत भी दी थी। इसके बावजूद रेलवे अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
तीन महीने पहले सांसद ने किया था दौरा
19 अप्रैल को सांसद चौधरी धर्मबीर ने अमृत योजना के तहत रेलवे स्टेशन को नया रूप देने की बात कही थी। योजना के तहत पुरानी बिल्डिंग को नया रूप देने के साथ ही बिजली-पानी सहित नया प्लेटफाॅर्म, पार्किंग, टूरिज्म स्थल आदि शामिल किया गया। इसके अलावा वेटिंग रूम, महिला रूम, आरपीएफ व जीआरपी क्वार्टर, दिव्यांगों के लिए व्हील चेयर उपलब्ध कराना, तीन टिन शेड बनाया जाएंगे। इसके लिए बजट पास करके टेंडर छोड़ दिया गया है।
प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर वाटर कूलर पड़ा है खराब
रेलवे स्टेशन पर मात्र एक आरओ से काम चलाया जा रहा है। यह आरओ भी प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर एक संस्था की ओर से लगाया गया था। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर एक वाटर कूलर तो लगा हुआ है, लेकिन वो खराब पड़ा है। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पानी की 10 टंकियां बनाई गई हैं, लेकिन उसकी टोंटियां टूटी हुई हैं।
बारिश के दौरान टिन शेड से पानी टपकता रहता है। यात्रियों के लिए ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं है। महिला व पुरुष शौचालय बने हैं, जिन पर ताले लटके हुए हैं। स्टेशन के अंदर जो शौचालय है, वहां चार्ज लिया जा रहा है।
बारिश और धूप से बचाव के लिए बड़ा टिन शेड नहीं
प्लेटफॉर्म नंबर दो पर आरओ तो दूर की बात बूथ की टोंटियां ही टूटी हुई हैं। यात्रियों को पानी पीने के लिए पुल पार कर प्लेटफॉर्म नंबर एक पर जाना पड़ता है। इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर कहीं शौचालय की सुविधा नहीं है। यात्रियों के लिए बैठने के लिए कुर्सियां तो हैं, लेकिन बारिश और धूप से बचाव के लिए बड़ा टिन शेड नहीं है। रेलवे ने कुर्सियों के ऊपर छोटे-छोटे टिन शेड तो लगाए हैं, लेकिन बारिश और धूप में उससे बचाव नहीं हो पाता।
हमने सभी कार्य अमृत स्टेशन योजना में शामिल किए हैं। अभी टेंडर हुआ है। टेंडर अलॉट होने के बाद सभी समस्याओं के समाधान के लिए काम शुरू हाे जाएगा।
- जितेंद्र शर्मा, वरिष्ठ वाणिज्यिक प्रबंधक, बीकानेर मंडल।