नारनौल। नगर परिषद की चेयरपर्सन का चुनाव हुए तीन माह बीत गए लेकिन अभी तक सदन की बैठक नहीं हुई। इसकी वजह से विकास कार्यों की कार्ययोजना भी नहीं तैयार की जा सकी है। विकास के सभी कार्य ठप पड़े हैं। शहर की जर्जर सड़कों की मरम्मत नहीं हो रही है। सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। सीवर जाम पड़े हैं। स्ट्रीट लाइटों का बुरा हाल है। कुर्सी संभालने के बाद चेयरपर्सन ने शहर की साफ-सफाई का जायजा तक नहीं लिया है।
जून 2021 में नगर परिषद भंग हो गई थी। इसके बाद शहर की बागडोर प्रशासक के हाथ में चली गई थी। प्रशासक ने शहर के विकास कार्यों में ज्यादा गंभीरता नहीं दिखाई। इसके बाद 19 जून को नगर परिषद की चेयरपर्सन का चुनाव हुआ और 22 जून को परिणाम आया था। इस चुनाव में कमलेश सैनी प्रदेश में सबसे अधिक साढ़े 14 हजार मतों से कमलेश सैनी चेयरमपर्सन निर्वाचित हुई थीं। 16 जुलाई को उन्होंने तथा पार्षदों ने शपथ ग्रहण किया था। चेयरपर्सन कमलेश सैनी से नागरिकों को काफी उम्मीदें थीं। वे इस बात को लेकर खुश थे कि अब शहर में लंबित पड़े विकास कार्य पूरे होंगे। मिनी सदन का गठन हुए लगभग दो माह से अधिक समय हो गया है लेकिन अभी तक नगर परिषद चेयरपर्सन ने आमसभा की मीटिंग नहीं बुलाई है। कुछ दिनों पहले उप प्रधान भी उनके फेवर के पार्षद संजीव यादव बन गए हैं। इसके बाद भी मीटिंग को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई। शहर के लोगों का कहना है कि एक साल से शहर के विकास कार्य ठप पड़े हैं। अब विकास के कार्य होने चाहिए।
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शहर में नहीं पार्किंग की सुविधा
बता दें कि शहर में नगर परिषद की ओर से किसी भी बाजार में पार्किंग नहीं बनाई गई। पार्किंग के अभाव में ग्राहकों को दुकानों के बाहर या सड़कों पर अपने वाहन खड़ा करना पड़ता है। दुकानों के आगे वाहन न खड़ा हो इसको लेकर दुकानदारों ने सड़कों पर अतिक्रमण किया हुआ है जिससे बाजार में जाम की स्थिति रहती है। अगर नगर परिषद की ओर से सभी बाजारों में अलग-अलग पार्किंग बना दी जाए, तो इससे जाम भी नहीं लगेगा और दुकानदार अतिक्रमण भी नहीं करेंगे।
सफाई के नाम पर नगर परिषद प्रशासन 50 लाख रुपये से अधिक प्रति माह खर्च करता है लेकिन सफाई का कोरम ही पूरा किया जा रहा है। नालों एवं नालियां की प्रतिदिन सफाई न होने से नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं। गली मोहल्लों में कूड़े के ढेर लगे हैं। बाजारों और मोहल्लों में कूड़ेदान भी नहीं रखवाए गए हैं। कूड़ा कलेक्शन गाड़ियां भी सभी जगह नहीं जाती हैं।
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बाक्स:
नहीं हुआ पार्कों का सुंदरीकरण
शहर में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 25 पार्क बनाए गए हैं। इन पार्कों की मरम्मत और सुंदरीकरण के लिए लाखों रुपये खर्च होने थे। इनमें से कुछ पार्कों पर काम भी चल रहा है लेकिन काम की गति धीमी है। सभी पार्कों की मरम्मत नहीं हो पाई है।
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गली, मोहल्लों की सड़कें हुईं जर्जर
शहर में 31 वार्ड हैं। इन सभी वार्डों की गलियां और सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। नागरिक अस्पताल से पुलिस लाइन तक सड़क पर छह महीने से काम चल रहा है लेकिन सड़क तैयार नहीं हो पाई। सड़कों पर कहीं छोटे तो कहीं गहरे गड्ढे बन गए हैं। बारिश होने पर लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई मोहल्लों में बारिश के पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। स्ट्रीटें लाइटें भी खराब पड़ी हुई हैं।
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वर्जन:
अगले सप्ताह आम सभा की बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में क्षेत्र के विकास संबंधित प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। जनता ने बड़ी उम्मीद से चेयरपर्सन बनाया है। कार्ययोजना बनाकर विकास कार्य किए जाएंगे।-कमलेश सैनी, नप चेयरपर्सन।