सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के बाद नवजात बच्चे को निजी अस्पताल में भर्ती करवाने के बाद चिकित्सक की कार्यशैली से नाराज परिजनों ने प्राइवेट अस्पताल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले की जानकारी लेकर परिजनों को शांत करवाया। परिजनों का आरोप है कि उक्त चिकित्सक ने ही सरकारी अस्पताल में जाकर ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी करवाई और उसके बाद बच्चे की हालत खस्ता होने का बहाना बना उसे निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर नर्सरी में भर्ती कर लिया।
पीड़ित गांव सैदपुर निवासी धर्मवीर ने बताया कि 27 जुलाई को सुबह लगभग छह बजे नागरिक अस्पताल में उसकी पत्नी की डिलीवरी ऑपरेशन से हुई थी। डिलीवरी के बाद डॉक्टर ने बताया कि नवजात की मां तो सकुशल है, लेकिन बच्चे का स्वास्थ्य अभी ठीक नहीं है और इसका इलाज सरकारी अस्पताल में संभव नहीं है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार उन्होंने नवजात को महेंद्रगढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करवा दिया। भर्ती करने से पूर्व अस्पताल प्रबंधन ने 15 हजार रुपए जमा भी करवा लिए। वहीं तीन दिन बीत जाने के बाद भी बच्चे को दिखाने के नाम पर अस्पताल प्रबंधन आनाकानी करता रहा और कहा गया कि 15 हजार रुपए और जमा करवाने होंगे, अभी नवजात का इलाज चल रहा है। नवजात के परिजन बच्चे को दिखाने की जिद्द पर अड़ गए और अस्पताल संचालक उनसे पैसों की डिमांड के अलावा बच्चे से भी नहीं मिलने दे रहे थे। परिजनों को डॉक्टर की कार्यप्रणाली पर शक हुआ और हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात के परिजनों तथा डॉक्टर के बीच हुए विवाद को सुलझाया। आखिरी में नवजात के परिजन बच्चे को वहां से रिलीव करवाकर नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए ले गए। वहीं चिकित्सक पंकज शर्मा का कहना है कि बच्चे की हालत नाजुक बनी थी और उसे नर्सरी में भर्ती किया जाना जरूरी था और अस्पताल नियमों के मुताबिक नर्सरी में दाखिल मरीज को बार-बार परिजनों से मिलवाना मरीज के लिए उचित नहीं था। इसी कारण नवजात के परिजनों ने हंगामे के हालात पैदा कर अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश की है।