जिला नागरिक अस्पताल में स्क्रब टाइफस की जांच की सुविधा उपलब्ध हो गई है। अब बुखार के मरीजों की डेंगू और मलेरिया के साथ स्क्रब टाइफस की भी जांच कराई जा रही है। अभी तक जिला अस्तपाल में इसके छह मरीज सामने आ चुके हैं। इसमें से एक मरीज की हालत गंभीर होने पर जयपुर रेफर किया गया था।
बता दें कि राजस्थान में स्क्रब टाइफस बीमारी लोगों में अधिक मिलती है। ऐसे में राजस्थान बार्डर से सटे हरियाणा के गांवों में भी लोग इससे पीड़ित हो रहे हैं। स्क्रब टाइफस नामक बीमारी भी डेंगू की भांति खतरनाक है। यदि बीमारी का सही समय पर इलाज न लिया जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। नागरिक अस्पताल में अभी तक इस बीमारी के छह मामले सामने आए हैं। जिला अस्पताल के डॉ. सुरेंद्र मित्तल ने बताया कि अभी तक छह मामलों में से एक को जयपुर रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि पांच मरीजों का अस्पताल में उपचार किया गया है। सभी मरीज स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में डेेंगू की तरह प्लेटलेट्स कम होने के साथ-साथ तेज बुखार व पीलिया हो जाता है। यह बीमारी टिक माइक नाम जीवाणुु के काटने से फैलती है। इसका असर छह से 12 दिन में दिखाई देने लगता है।
बीमारी के लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के बाद पनपने वाले टिक माइक नामक जीवाणु के काटने से फैलती है। इसका असर छह से 12 दिन के बाद दिखाई देने लगता है। जीवाणु के काटने के बाद तेज बुखार के साथ मरीज की आंखें लाल हो जाना, पेट में पानी भर जाना व पेट के ऊपर काले रंग का निशान बन जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। वहीं इस बीमारी में प्लेटलेट्स कम होने के साथ पीलिया के लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में इस बीमारी के लिए अलग से उपचार की जरूरत होती है। एक हफ्ते के भीतर यदि बीमारी का पता लग जाए तो उसका इलाज किया जा सकता है। वरना कई सारी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। यह मल्टिपल आर्गन डैमेज कर सकती है।
बीमारी से बचने के उपाय
डॉ. सुरेंद्र मित्तल ने बताया कि यह बीमारी खासकर गांवों में होती है। ऐसे में खेतों में जाने वाले लोग सावधानी बरतें। खुले में शौच करने न जाएं और 104 या इससे अधिक डिग्री का बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक के पास जाकर रक्त की जांच करवाएं, ताकि बीमारी पर समय पर काबू किया जा सके।
स्क्रब टाइफस के जांच का इंतजाम जिला अस्पताल में उपलब्ध है। अब स्वास्थ्य विभाग डेंगू, मलेरिया के साथ स्क्रब टाइफस की भी जांच करा रहा है। ग्रामीण स्तर पर डेंगू और मलेरिया से साथ इस बीमारी के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. धर्मेश सैनी, डिप्टी सीएमओ नारनौल।