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हिंदी अब विश्व भाषा बन चुकी है : डॉ. मोना

Thu, 09 Jan 2025 10:02 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो नंबर-08कार्यक्रम के दौरान अति​थियों का सम्मान करते संस्था के सदस्य। स्रोत-संस्था
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नारनौल। मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट ने वीरवार को विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में विचार गोष्ठी का आयोजन मनुमुक्त भवन में किया। संचालन डॉ. पंकज गौड़ ने किया। गोष्ठी में भारत, बुल्गारिया और ब्रिटेन के साहित्यकारों ने वैश्विक परिदृश्य में हिंदी की स्थिति पर चर्चा की।
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सोफिया विश्वविद्यालय (बुल्गारिया) में इंडोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मोना कौशिक ने कहा कि हिंदी अब विश्व भाषा बन चुकी है, तो काव्य-रंग यूके, नाॅटिंघम (ब्रिटेन) की संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. जया वर्मा ने कहा कि प्रवासी भारतीय अपनी मातृभूमि और मातृभाषा को कभी नहीं भूलते।

चीफ ट्रस्टी और सिंघानिया विश्वविद्यालय, (राजस्थान) के प्रोफेसर एवं डीन डॉ. रामनिवास ने कहा कि हिंदी देश को एकता के सूत्र में पिरोने के साथ विश्व स्तर पर संपर्क-भाषा के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कालिंदी काॅलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. आरती पाठक, एमएमटी की ट्रस्टी डॉ. कांता भारती, हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश) की हिंदी सेवी नीरू बालियान, विद्यालय पाठ्यक्रम समिति, गुरुग्राम के सदस्य डॉ. पंकज गौड़ और अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिला अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने भी विचार-विमर्श में सहभागिता की। इस अवसर पर ट्रस्ट द्वारा डॉ. मोना कौशिक और डॉ. जया वर्मा को हिंदी भाषा, साहित्य एवं नागरी लिपि के विकास में उल्लेखनीय योगदान के दृष्टिगत, अंगवस्त्र स्मृति-चिह्न और सम्मान-पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया। वहीं डॉ. रामनिवास की काव्य-कृति शहर के बीचोबीच का विमोचन भी विशिष्ट अतिथियों ने किया।
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