अपर्याप्त भोजन, गैर पौष्टिक भोजन, माता के पोषण में कमी, स्वच्छ वातावरण का अभाव, स्वच्छता व्यवहार के प्रति उदासीनता, जीवन के पहले एक हजार दिनों में पोषण देखभाल की कमी स्टंटिंग के मुख्य कारण हैं।
स्टंटिंग से जीवन पर होने वाले प्रभाव
शारीरिक व मानसिक विकास में बाधा आना, मधुमेह, मोटापे व उच्च रक्तचाप का खतरा, दिमाग का विकसित न होना, स्टंटेड किशोरी भविष्य में छोटे कद की मां बनेगी। छोटे कद की महिला द्वारा गर्भ धारण गर्भावस्था के दौरान चिकित्सीय जटिलता में आता है। ऐसे केसों में जन्म के समय शिशु कम वजन के होते हैं।
स्टंटिंग को रोकने के उपाय
शीघ्र स्तनपान, छह माह तक केवल स्तनपान, समय से ऊपरी आहार की मात्रा बढ़ाना, आयरन फोलिक एसिड और कैल्शियम का प्रयोग, जिंक और आयोडिन युक्त नमक का प्रयोग, विटामिन ए का प्रयोग, कृमिनाशक गोलियों का सेवन, मातृ पोषण पर फोकस कर स्टंटिंग रोक सकते हैं।
माह अति कुपोषित कुपोषित उम्र के अनुसार लंबाई व वजन न बढ़ना
जनवरी 380 1412 7404
फरवरी 461 1603 8104
मार्च 389 1463 8045
अप्रैल 374 1388 8042
मई 339 1100 6970
जून 342 993 6091
माह उम्र के अनुसार लंबाई व वजन न बढ़ना वजन के अनुसार कमजोर (5 से 6 साल तक)
जनवरी 400 157
फरवरी 480 187
मार्च 422 151
अप्रैल 420 141
मई 372 128
जून 350 117
अधिकारी के अनुसार
जो बच्चे कुपोषित, अति कुपोषित मिले हैं, उनके घरों में आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर जाते हैं। अपने सामने पौष्टिक आहार खिलाते हैं। एक माह में चार बार घरों पर महिला कर्मचारी जाती है। बच्चों की लंबाई व वजन चेक किया जाता है। पूरे परिवार की काउंसिलिंग भी की जाती है कि वह इस बारे में नजरअंदाज नहीं करें। - संगीता यादव, जिला परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, नारनौल।