महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) में अब बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मिलेट्स से पौष्टिक और नए खाद्य उत्पाद बनाने पर शोध किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की विज्ञान एवं धरोहर अनुसंधान पहल (एसएचआरआई) के तहत 2.45 करोड़ रुपये की सहायता दी है।
डॉ. सविता बुधवार के नेतृत्व में हकेंवि की टीम आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों, पोषण संवर्धन, मूल्य संवर्धन व मिलेट्स आधारित उपयोगी प्रोटीन उत्पादों के विकास पर शोध कार्य करेगी। यह परियोजना पोषण सुरक्षा, मिलेट्स के उपभोग को बढ़ावा देने, खाद्य नवाचार व उद्यमिता विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि इस प्रकार की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शोध परियोजना प्राप्त होना विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं शोध क्षमता का प्रमाण है। यह परियोजना पोषण एवं मिलेट्स आधारित खाद्य नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के नवाचारी, बहुविषयक व सामाजिक सरोकारों से जुड़े शोध कार्यों को नई मजबूती प्रदान करेगी।
विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा, कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार, शोध अधिष्ठाता प्रो. नीलम सांगवान व विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने भी डॉ. सविता बुधवार व उनकी शोध टीम को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी।
इन संस्थाओं का रहेगा सहयोग
इस प्रतिष्ठित बहु-संस्थागत परियोजना में डॉ. सविता बुधवार हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की ओर से मुख्य अन्वेषक की भूमिका निभाएंगी। परियोजना में भारतीय श्रीअन्न अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर), वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की प्रयोगशालाएं, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, वेल्लोर प्रौद्योगिकी संस्थान व गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय संस्थान सहभागी हैं।
दो साल में पूरा होगा शोध
डॉ. सविता बुधवार ने बताया कि यह शोध दो साल के लिए स्वीकृत की गई है। इसका उद्देश्य आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से मिलेट्स आधारित विशेष खाद्य सामग्रियों एवं स्मार्ट प्रोटीन उत्पादों का विकास करना है। यह परियोजना भारत सरकार की श्रीअन्न पहल में विशेष सहयोग करेगी।