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स्वास्थ्य कर्मी हो रहे थकान, अनिद्रा और बेचैनी का शिकार

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नारनौल। अपनी सेहत की चिंता छोड़ दूसरों की सलामती के लिए दिन रात एक कर रहे जिले के स्वास्थ्य कर्मी धीरे-धीरे थकान, अनिद्रा और बेचैनी का शिकार हो रहे हैं। समाज चाहे तो इन स्वास्थ्य कर्मियों को इस मुसीबत से जल्द बाहर निकाल सकता है बशर्ते कि हम सब लॉक डाउन व कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार को सही ढंग से अपने ऊपर लागू करें।
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इस वक्त चिकित्सकों सहित सभी स्वास्थ्य कर्मियों के कंधों पर एक साथ कई मोर्चों पर लड़ने की जिम्मेदारी है। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए उन्हें हर रोज दो हजार से भी अधिक लोगों के सैंपल लेने पड़ रहे हैं। टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए निर्धारित समय से अधिक कार्य करना पड़ रहा है। हर रोज लगभग 3350 नागरिकों को टीके लगाए जा रहे हैं। इन सब विपरीत हालात में कोविड-19 से संक्रमित होकर नागरिक अस्पताल में दाखिल होने वाले मरीजों को संभालना होता है।
इतना ही नहीं जब किसी का अपना इस दुनिया से चला जाता है तो उसे कई बार परिजनों की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है। इन सभी मुसीबतों को झेलते हुए भी ऐसे विपरीत हालात में जिले के स्वास्थ्य कर्मी दिन रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं तथा लोगों को बेहतरीन इलाज मुहैया करवाने के हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
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जिले में अब तक कोविड-19 से 72 स्वास्थ्य कर्मी ग्रसित हो चुके हैं। फिलहाल जिले में 52 स्वास्थ्य कर्मी कोविड-19 संक्रमित हैं। इसमें डॉक्टर से लेकर सफाई कर्मी तक शामिल हैं। राहत वाली बात यह है कि अब तक 99 फीसदी स्वास्थ्य कर्मियों को पहला टीका लग चुका है। इसी सुरक्षा चक्र के कारण फिलहाल स्वास्थ्य कर्मी उस गति से कोविड-19 के पॉजिटिव नहीं हो रहे हैं जितना पहले होते थे। बावजूद इसके बार-बार उन्हें मरीजों के संपर्क में रहना पड़ता है जिस कारण उन्हें अपने परिजनों की चिंता रहती है। ड्यूटी के बाद घर जाने के बाद कहीं ना कहीं उसके मन में अपने परिजनों के प्रति चिंता का भाव हमेशा रहता है।
यही कारण है कि स्वास्थ्य कर्मी अनिद्रा व बेचैनी का लगातार शिकार हो रहा है। जिले में 122 स्वास्थ्य कर्मियों ने अनिद्रा व बेचैनी की शिकायत की है। इसके बावजूद फ्रंटलाइन वर्कर होने के नाते वे इस मोर्चे पर डटे हुए हैं। कई चिकित्सा कर्मी तो कोविड-19 पॉजिटिव होने के बाद भी घर से ही अन्य कार्यों में विभाग की सहायता कर रहे हैं।
विकट हालात में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना है : उपायुक्त
स्वास्थ्य कर्मियों के सामने आ रही चुनौतियों के संबंध में उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि निश्चित तौर पर स्वास्थ्य कर्मियों पर न केवल काम का बोझ है बल्कि उनके मन में अपने परिवार की चिंता भी रहती है। पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से स्वास्थ्य सेवाओं पर बहुत अधिक भार आया है। राज्य सरकार ने अस्पतालों में सुविधाओं की बढ़ोतरी की है वहीं पर चिकित्सकों को भी समय-समय पर प्रोत्साहित करने का कार्य किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी चिकित्सकों को मोटिवेट रखें। आम नागरिकों को इस हालात को समझना होगा तथा उन्हें लॉकडाउन सहित कोविड-19 के संबंध में दी गई सभी गाइडलाइन की पालना करनी होगी ताकि जल्द से जल्द हम इस संक्रमण की चैन को तोड़ सकें।
स्वास्थ्य कर्मियों को लगातार मोटिवेट कर रहे हैं : डॉ अशोक कुमार
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि जिला में लोगों को हर संभव बेहतरीन इलाज मुहैया करवाया जा रहा है। अगर सभी नागरिक सौ फीसदी मास्क को सही तरीके से लगाएं तो हम जल्द ही कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने में कामयाब हो सकते हैं। अभी भी लोग मास्क जान बचाने के लिए नहीं बल्कि चालान से बचने के लिए लगा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि लगातार वर्क लोड के कारण सभी स्वास्थ्य कर्मियों के मन में थोड़ी बहुत बेचैनी होना स्वाभाविक है। चाहे दिन में एक भी मौत किसी भी कारण से हुई हो हर आदमी के मन में कई देर तक वह बात रहती है। आखिर डॉक्टर भी इंसान ही हैं उन्हें हर रोज इसी स्थिति से गुजरना पड़ता है। साथ ही अपने परिवार को भी संक्रमण से बचाना है। इसके बावजूद सभी चिकित्सा अधिकारी तथा स्वास्थ्य कर्मी अपनी पूरी हिम्मत के साथ लोगों की सेवा में जुटे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों को लगातार मोटिवेट किया जा रहा है। उन्हें हर रोज योग व शारीरिक अभ्यास के लिए समय निकालने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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