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380 गांवों, शहरों सहित 14 लाख की आबादी के लिए जिले में केवल एक अल्ट्रासाउंड मशीन

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महेंद्रगढ़ जिले में रेतीला-पथरीला एरिया होने के कारण यहां पेट में पथरी की शिकायत प्रदेश में सबसे अधिक रहती है। इसके बावजूद यहां करीब 14 लाख की आबादी से अधिक लोगों के लिए अल्ट्रासाउंड की कोई व्यवस्था नहीं है। महेंद्रगढ़-कनीना विधानसभा क्षेत्र के लोग नारनौल जाने को मजबूर हैं। सरकारी स्तर पर पूरे जिले में केवल एक अल्ट्रासाउंड मशीन है। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण 15 दिन बाद की अल्ट्रासाउंड की तारीख मिल रही हैं।
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महेंद्रगढ़ जिले के करीब 14 लाख लोगों के लिए केवल एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन है। महेंद्रगढ़, अटेली, सतनाली, कनीना, नांगल चौधरी शहरों में आज तक सरकारी स्तर पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं दी जा सकी। जिले की चार विधानसभा के दायरे में आने वाले 380 गांवों के लिए नारनौल में ही अल्ट्रासाउंड है। जहां केवल एक ही चिकित्सक तैनात है। जो महज 6 घंटे ड्यूटी करता है। रविवार के अलावा अन्य सरकारी अवकाश के दिन अल्ट्रासाउंड जांच बंद रहती है। इस कारण मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी लंबी तारीखें मिलती हैं। यहां भी गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है। इस कारण पेट दर्द के मरीजों को 15 दिन बाद की तारीख मिलती है।
महेंद्रगढ़ उप नागरिक अस्पताल में रोजाना 600 की ओपीडी होती है। सतनाली में करीब 200, कनीना में करीब 400, अटेली में करीब 250, नांगल चौधरी में करीब 200 ओपीडी होती है। नारनौल के नागरिक अस्पताल में करीब एक हजार ओपीडी रोजाना होती हैं। जिले की पीएचसी, सीएचसी, उप नागरिक अस्पताल, नागरिक अस्पतालों में रोजाना तीन हजार से अधिक ओपीडी होती हैं। जिसमें 10 प्रतिशत को भी अल्ट्रासाउंड की जरूरत मानी जाए तो करीब 300 लोगों को रोजाना अल्ट्रासाउंड की डिमांड रहती है। नारनौल नागरिक अस्पताल में चिकित्सक एक दिन में 100-150 से अधिक अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाते। ऐसे में रोजाना 150 से अधिक मरीजों को निजी अस्पतालों की शरण लेने को मजबूर होना पड़ता है।
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स्वास्थ्य मंत्री भी नहीं सुधार पाए
महेंद्रगढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। महेंद्रगढ़ जिले ने कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री भी दिया। राव नरेंद्र सिंह कांग्रेस की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे थे। इसके बाद भी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में जिला फिसड्डी है। जिले के 380 गांवों के लिए केवल एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन है। जिला मुख्यालय पर केवल एक ही मशीन है।
सतनाली क्षेत्र, कनीना, अटेली क्षेत्र के बार्डर पर बसे गांवों को अगर अल्ट्रासाउंड कराना हो तो उनको 57 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। सतनाली के गांव ढाणी कुम्हाराण के लोगों को नारनौल 60 किलोमीटर दूर पड़ता है। स्याणा, पोता सहित अन्य गांवों को अल्ट्रासाउंड के लिए 55 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
अल्ट्रासाउंड मशीन का प्रस्ताव आया था ।अभी मशीन को नहीं लगा सकते। रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध न होने के कारण मशीन नहीं लगाई जा रही। इस बारे में प्रदेश सरकार को लिखा हुआ है। मुख्यालय से मिले निर्देशों के अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. अशोक, कार्यकारी सीएमओ, महेंद्रगढ़-नारनौल।
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