नारनौल। प्रतिबंध के बाद भी प्लास्टिक के बैग पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। पॉलीथिन के खिलाफ कभी-कभार ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। इसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। हालांकि हरित वसुंधरा आधार समिति जिले को प्लास्टिक बैग से मुक्त करने में जुटी है। समिति की ओर से सात वर्षों में 6,963 इको फ्रेंडली बैग बांटकर लोगों का जागरूक किया जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस 3 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन लोगों को प्लास्टिक बैग के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जाता है। जिले को प्लास्टिक बैग मुक्त करने के लिए हरित वसुंधरा आधार समिति के पदाधिकारी व सदस्य लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
समिति करीब 7 वर्षों में 6,963 इको फ्रेंडली बैग वितरित कर चुकी है। समिति के सदस्य सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और फेसबुक आदि के माध्यम से लगातार पर्यावरण के प्रति जनजागरण अभियान चला रहे हैं।
समिति के वाइस प्रेसिडेंट जगदीश यादव ने बताया कि बचपन में जब सुभाष स्टेडियम में खेलने जाता था तो वहां गिने चुने ही पेड़ होते थे। कई वर्षों बाद जब अपने बच्चों को लेकर स्टेडियम गया तब भी पेड़ों की संख्या उतनी ही थी। तभी समिति गठित करने का विचार आया। इसके बाद पर्यावरण सरंक्षण व आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से अप्रैल 2019 को समिति का गठन कर रजिस्टर्ड कराया गया।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में इस अभियान में उनके साथ कुछ साथी जुड़े थे लेकिन धीरे धीरे उनके साथ लोग जुड़ने लगे। आज उनकी टीम में 51 लोग हैं। उनकी टीम सड़क किनारे पड़े सिंगल यूज प्लास्टिक को एकत्रित कर डंपिंग यार्ड में डलवाती है।
जरूरतमंद महिलाएं सिलती हैं बैग
यादव ने बताया कि बाजार से सूती कपड़ा खरीदकर स्थानीय जरूरतमंद महिलाओं से बैग सिलवाए जाते हैं। इसकी एवज में उन्हें उनका मेहनताना दिया जाता है। इन इको फ्रेंडली बैग पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश लिखा होता है। शहर में होने वाले छोटे बड़े आयोजन के दौरान फैलने वाले प्लास्टिक को रोकने के लिए समिति की ओर से हरित थाली बैंक 2025 में शुरू किया गया। इस स्टेनलेस थाली के साथ एक चम्मच व गिलास भी दिया जाता है।
अब तक लगाए हजारों पौधे
भावी पीढ़ी को एक अच्छा व सुरक्षित पर्यावरण देने के उद्देश्य से काम कर रही समिति अब तक ट्री गार्ड के साथ स्टेडियम, शहर के चारों स्वर्ग आश्रम, शोभा सागर तालाब, पीजी व गर्ल्स कॉलेज व सैनी स्कूल सहित अनेक स्थानों पर छायादार व फलदार करीब 8 हजार पौधे लगा चुके हैं।