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हजारों हेक्टेयर गेहू बिजाई प्रभावित

Sun, 20 Nov 2016 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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लोग परेशान
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 1000 एवं 500 रूपए के नोट बंद होने के बाद किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। खाद व बीज न मिलने से गेहूं की एक तिहाई फसल बिजाई नहीं की जा सकी है। किसान रुपयों के लिए भटक रहा है लेकिन न तो मंडी के व्यापारियों से न ही बैंकों से उनको रुपये मिल रहे हैं। सरकारी खाद एवं बीज की दुकानों पर 1000 और 500 के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं अधिकतम किसानों के खाते कोऑपरेटिव बैंकों में हैं वहां भी पिछले कई दिनों से न तो नकदी मिल रही है और न ही 1000 और 500 के नोट जमा किए जा रहे हैं। आर्थिक तंगी को लेकर किसान के माथेे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं।
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खाद-बीज खरीदने में हो रही परेशानी
  कनीना क्षेत्र के विभिन्न गावों में लगभग 2 हजार हैक्टेयर भूमि गेहूं बिजाई होनी है लेकिन पुराने बड़े नोट का प्रचलन नहीं होने के कारण किसानों को खाद व बीज खरीदने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में 34000 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। जिसमें से 20650 हेक्टेयर में सरसों, 300 हेक्टेयर में मटर, 6500 हेक्टेयर में गेहूं, 10 हेक्टेयर में चना, 450 हेक्टेयर में हरा चारा, 200 हेक्टेयर में पालेज की बिजाई की जा चुकी है।

उधार से चला रहे हैं काम
कुछ किसान उधार सामान खरीद रहे हैं तो कुछ कतार में खड़े होकर बैंक से पैसे निकलवाकर बीज खरीदने का प्रबंध कर रहे हैं। बैंक से किसानों को मुश्किल से 2 हजार रूपए की राशि मिल रही है जिससे उनके द्वारा बीज व खाद भी नहीं खरीदा जा रहा है। क्योंकि एक एकड़ गेहूं बिजाई में करीब तीन हजार रूपए का खाद-बीज खरीदना पड़ता है। बहुत से किसान 10 एकड़ से अधिक की खेती करते हैं जिनको बिजाई के लिए 30 हजार रुपये से अधिक चाहिए जो कि कहीं से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
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खाद बीज विक्रेता आलोक कुमार का कहना है कि पुराने नोट के फेर में उनका करीब 25 फीसदी बिक्री कार्य प्रभावित हुआ है। किसान उनके पास खाद बीज के लिए पंहुच रहे हैं जिनमें से अधिकांश को उधार में सामान दिया है।

किसान क्रेटिड कार्ड व बचत खातों में जमा हुए साढ़े तीन करोड़
 इलाहबाद बैंक के शाखा प्रबंधक बलवान सिंह ने बताया कि हमारे बैंक में पिछले दस दिनों में साढे़ तीन करोड़ रूपए किसान क्रेटिड कार्ड व बचत खातों में जमा हुए हैं, जबकि इतनी राशि पिछले ढ़ाई साल में जमा हुई थी। जो करीब पौने चार करोउ़ थी।

किसान मोहनलाल कनीना नेे बताया कि उनके द्वारा करीब 15 एकड़ भूमि पर खेती की जाती है नोट बंदी से चलते गेहूं का बीज नहीं मिल पा रहा है। खाद बीज खरीदने में दिक्कत आ रही है। खाद के लिए भी पुराने नोट नहीं लिए जा रहे है। नए नोट बैंक से निकल नहीं रहे हैं। ऐसे में क्या करे।

गुढ़ा वासी किसान पृथ्वीचंद ने बताया कि वे करीब 10 एकड़ में खेती करते हैं। उनके द्वारा बीज तो पहले ही खरीद लिया था लेकिन अब खाद लेने के लिए चक्कर लगा रहे हैं क्योंकि 500 एवं 1000 के नोट नहीं लिए जा रहे है। बैंक से भी पैसे मिल नहीं रहे।   

इफ्को किसान सेवा केंद्र के वरिष्ठ बिक्री सहायक अजीत सिंह ने बताया कि पिछले साल उनके यहां नवबंर तक 1350 एमटी खाद एवं अन्य कृषि उपयोगी सामान बेचा गया था जबकि इस बार 977 एमटी सामान ही बिक सका है। नोट बंदी का असर पर पड़ा है जिससे 20 से 25 फीसदी सेल प्रभावित हुई है।
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