कनीना। सरकारी स्कूलों में अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण, पात्रता परीक्षा, तबादला नीति और गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच वरिष्ठ समाजसेवी अनिल यादव ने शिक्षकों के सेवा संबंधी मामलों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि नीतियों और न्यायिक प्रक्रियाओं को लेकर बनी अनिश्चितता का असर शिक्षकों के काम पर पड़ सकता है।
अनिल यादव ने कहा कि बेहतर शिक्षा के लिए शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच नियमित संवाद जरूरी है। अतिथि और संविदा शिक्षकों के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए, ताकि उन्हें बार-बार आंदोलन या न्यायालय का सहारा न लेना पड़े। पात्रता परीक्षा में लंबे समय से अध्यापन कर रहे शिक्षकों के अनुभव और सेवा अवधि को भी ध्यान में रखने की बात कही।
उन्होंने तबादला नीति में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों को पहले से स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि तबादले किस आधार पर होंगे। उन्होंने जनगणना, मतदाता सूची पुनरीक्षण और बीएलओ जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
यादव ने पीएम श्री और मॉडल संस्कृति स्कूलों के साथ शिक्षकों को भी स्थिर सेवा वातावरण देने तथा सभी मामलों पर समयबद्ध रोडमैप बनाने की मांग की।