फोटो नंबर- 17सरसों की तुलाई करते श्रमिक। संवाद
नारनौल। जिले की छह मंडियों में 28 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरू की जाएगी। मूल्य समर्थन योजना के तहत हैफेड की ओर से सरसों की खरीद की जाएगी। पिछले दिनों बारिश के कारण खेत में सरसों फसल भीग गई है। मौसम विभाग ने फिर बारिश की आशंका जताई है। ऐसे में फसल सुरक्षा को लेकर किसान चिंतित हैं। किसानों ने खुद मंडी में तिरपाल लेकर आने का निर्णय लिया है ताकि सरसों को भीगने से बचाया जा सके।
नई अनाज मंडी में भी मार्केट कमेटी की ओर से तिरपाल की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके कारण बारिश की संभावना के चलते किसानों को सरसों ढकने के लिए तिरपाल स्वयं लेकर आना पड़ेगा। हालांकि नई अनाज मंडी में दो टीन शेड बने हुए हैं और प्रत्येक टीन शेड में करीब 50 हजार बैग सरसों रखने की क्षमता है।
अन्य फसल की तुलना में सरसों की आवक हमेशा ज्यादा रहती है, जिस कारण खुले में लगने वाली ढेरियों के भीगने का खतरा बना रहता है। गौरतलब है कि गत वर्ष भी खरीद के दौरान आई बारिश से मंडी में सरसों भीग गई थी, किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।
9 दिनों में 6841 क्विंटल सरसों की हुई आवक
एमएसपी की तुलना में सरसों का बाजार भाव 200 से 500 रुपये अधिक बना हुआ है। 42 प्रतिशत लैब से अधिक सरसों के भाव 6700 और 40 या इससे कम प्रतिशत वाली लैब के बाजार भाव 6400 रुपये बने हुए हैं। वहीं सरकारी खरीद के लिए एमएसपी 6200 रुपये निर्धारित की गई है। जिस कारण किसान सरसों की फसल व्यापारियों व तेल मील संचालकों को बेच रहे हैं। 9 दिनों में अब तक मंडी में 6841 क्विंटल सरसों की आवक हुई है।
वर्जन :
सरसों खरीद की सभी तैयारियां कर ली गई हैं। हमारे पास 1800 बंडल बारदाने उपलब्ध हैं। वहीं तुलाई के लिए नए व सही कांटों की व्यवस्था की गई है। किसानों से अपील है कि सरसों को अच्छे से सुखाकर मंडी लाएं ताकि परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।-प्रवीण भारद्वाज, प्रबंधक, हैफेड, नारनौल।