कनीना। कनीना के ढोकलामल पार्क मंदिर में चल रही 10 दिवसीय श्रीमद् शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन सती चरित्र कथा सुनाई गई।
कथा वाचक आचार्य हेमराज भारद्वाज ने बताया कि माता सती के पिता दक्ष ने एक यज्ञ किया था और उसमें अपने सभी सगे संबंधियों को बुलाया, लेकिन बेटी सती के पति भगवान शंकर को नहीं बुलाया। जब सती को यह पता चला तो उन्हें बड़ा दुख हुआ और उन्होंने भगवान शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि बिना बुलाए कहीं जाने से इंसान के सम्मान में कमी आती है, लेकिन माता सती नहीं मानी और राजा दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में पहुंच गई। वहां पहुंचने पर सती ने पिता सहित सभी को बुरा भला कहा और स्वयं को यज्ञ अग्नि में स्वाहा कर दिया।
जब भगवान शिव को ये पता चला तो उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोलकर राजा दक्ष की नगरी को तहस-नहस कर दिया। सती का शव लेकर घूमते रहे। भगवन विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े किए। जहां शरीर का टुकड़ा गिरा वहां-वहां शक्तिपीठ बनी। उन्होंने बताया कि परिवार में सभी को मिलजुल कर रहना चाहिए।
सबसे बड़े व्यक्ति का या फर्ज बनता है कि वह सबसे छोटे व्यक्ति तक सबका ख्याल रखें। जब भी कोई कार्य करें तो परिवार की सहमति लेकर कार्य करें इससे वह कार्य अच्छे ढंग से पूर्ण होगा। यह 10 दिवसीय श्रीमद शिव महापुराण कथा 20 जुलाई तक चलेगी। दोपहर 12 बजे से दो बजे तक विभिन्न प्रसंग सुनाए जाएंगे। इस अवसर पर सुशील कुमार, लाली, पीटीआई महेंद्र कुमार, सरिता, आरती, संजू बाई, मुकेश देवी, सुशीला यादव, निर्मला, घनश्याम, तुलसी कुमारी, मंजू, रचना, मंजीता आदि मौजूद रहीं।
फोटो संख्या:51- कनीना के ढोकलमल पार्क में आयोजित श्रीमद् शिव महापुराण कथा में प्रवचन सुनती महि