फोटो संख्या:59- कनीना में नानी बाई का मायरा की कथा में झांकी निकालते श्रद्धालु--स्रोत- आयोजक
कनीना। कनीना मंडी में श्याम मित्र मंडल के तत्वावधान में चल रही नानी बाई रो मायराे की कथा में नरसी भगत व नानी बाई का प्रसंग सुनाया गया।
आचार्य प्रवेश रसिक ने कहा कि नरसी भगत ने अपनी भक्ति और भगवान कृष्ण की कृपा से नानी बाई का मायरा शादी में दिया जाने वाला उपहार भरा था। नरसी भगत भगवान कृष्ण के परम भक्त थे। उन्होंने अपनी भक्ति के बल पर कई चमत्कार दिखाए थे। नानी बाई की शादी होने वाली थी। लेकिन उनके परिवार के पास मायरा ससुराल में उपहार देने की रस्म का खर्च उठाने के लिए पैसे नहीं थे।
नरसी भगत ने नानी बाई के मायरा भरने का जिम्मा लिया, लेकिन उनके पास भी कुछ नहीं था। उन्होंने भगवान कृष्ण से प्रार्थना की और कृष्ण ने उनकी प्रार्थना सुनी। भगवान कृष्ण ने स्वयं नरसी भगत का रूप धारण करके नानी बाई के ससुराल पहुंचे और उनका मायरा भरा। उन्होंने बताया कि इस कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि भगवान अपने भक्तों पर हमेशा कृपा करते हैं और उनकी भक्ति का फल अवश्य देते हैं।
यह कथा नानी बाई रो मायराे की कथा के रूप में प्रसिद्ध है। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रवक्ता सचिन कुमार ने किया। इस अवसर पर श्याम मित्र मंडल के प्रधान अनिल गर्ग, प्रधान निरंजन मित्तल, विनोद मित्तल, रवींद्र बंसल, संजय गर्ग, पूर्व पार्षद रोशन लाल गोयल, विजेंद्र, मुकेश सिंगला सहित अनेक लोग मौजूद रहे।