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Mahendragarh-Narnaul News: सावन मास आज से मंदिरों में गूंजेंगे बम-बम भोले के जयकारे

Thu, 10 Jul 2025 11:57 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो नंबर-17नारनौल का प्राचीन मोडावाला मंदिर।
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नारनौल। सावन में भगवान शिव की पूजा को लेकर वीरवार को सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। अब सावन के पहले दिन शुक्रवार से मंदिरों में बम-बम भोले के जयकारे गूंजेंगे।
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सावन में शहर का प्राचीन मोडावाला मंदिर, छोटा बड़ा तालाब शिव मंदिर तथा मोटा महादेव मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। सावन एक अवसर देता है कि हम अपने अंदर काम कर रही प्रकृति की शक्तियों को जान लें। हम खाते हैं, पढ़ते हैं और विकसित होते हैं। यह प्रकृति है। हम प्राकृतिक शक्तियों के अधीन हैं। वह हमें बाध्य करती हैं, लेकिन जब हम आध्यात्मिक रूप से जाग जाते हैं, तो शिव से मुलाकात होती है। शिव से मिलने के लिए सावन अनुकूल महीना है।
ज्योतिषाचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास में ही समुद्र मंथन से 14 रत्न प्राप्त हुए थे। इसमें एक था हलाहल विष। इस विष को शिवजी ने अपने गले में स्थापित कर लिया था, जिससे उनका नाम नीलकंठ पड़ा। विष की जलन रोकने के लिए सभी देवताओं ने उन पर गंगा जल डाला। समूचा सावन शिव की खूबियां से भरा है।
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महादेव की तरह सावन भी गर्मी से तपती धरती को बारिश से तृप्त करता है। जीव-जंतु और प्रकृति का यह सृजन का काल है। सावन का स्वागत करना है तो अपने अंदर से ईष्या, द्वेष, भय, क्रोध और अहंकार को मिटाना होगा। इसके लिए हृदय को निर्मल और पवित्र बनाना होगा। जब हमारे आचरण में सरलता, आनंद, पवित्रता और प्रेम का गुण होगा, तभी प्रकृति में स्थित शिव को देख पाएंगे।
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सावन सृजन का महीना है : क्रांति निर्मल
आचार्य क्रांति निर्मल ने बताया कि सावन सृजन का महीना है। सृजन के लिए प्रेम और पवित्रता का भाव जरूरी है। सावन का हर दिन व्रत और पर्व को समर्पित है। चूंकि शक्ति से ही शक्तिमान हैं। इस कारण शंकर की पूजा सावन के हर सोमवार और हर मंगलवार को गौरी व्रत का अनुष्ठान होता है। मंगलवार को होने के कारण इसे गौरी मंगला व्रत कहा जाता है। शक्ति के साथ शिव कल्याणकारी हों, इसलिए सावन पूरी तरह से शिव-शक्ति को समर्पित महीना है। इस माह में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, व महारुद्र यज्ञ करवाने का विशेष महत्व है।
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