फोटो नंबर-08नारनौल नगर परिषद के एक बंद कमरे में रखी लाइटें। संवाद
नारनौल। नगर परिषद के एक कमरे को चार हजार लाइटें रोशन कर रही हैं। वहीं शहर के कई इलाके स्ट्रीट लाइटें नहीं लगने से अंधेरे में रहते हैं।
शहर के वार्डों में अंधेरे को दूर करने के लिए पार्षदों ने स्ट्रीट लाइटों की मांग कई बार सदन की बैठक में उठाई थी। इसके बाद भी जब लाइटें नगर परिषद में नहीं आई तो कुछ पार्षदों ने निजी कोष से लाइटें लगवाना शुरू कर दिया था। इसे देखते नगर परिषद ने पिछले साल करीब दस हजार लाइटें मंगवाई गई थी।
नगर परिषद में करीब एक करोड़ तीस लाख रुपये की लागत से आई इन लाइटों के लग जाने के बाद और भी लाइटें आनी थीं लेकिन नगर परिषद की अनदेखी के चलते एक साल पहले आईं लाइटों में करीब छह हजार लाइटें ही शहर में लग पाई हैं। चार हजार लाइटें अभी भी नगर परिषद के एक बंद कमरे में धूल फांक रही हैं।
इन लाइटों से पिछली दीपावली को रोशन होने वाला शहर एक साल बाद भी पूरी तरह रोशन नहीं हो पाया जबकि दूसरी दीपावली भी अब अगले महीने आने वाली है। इन लाइटों के आने के बाद करीब पांच महीने तक तो इनके लगाने का टेंडर नहीं छूट पाया था। इस पर जब पार्षदों ने शोर मचाना शुरू किया तो किसी पार्षद को वार्ड में लगाने के लिए 100 तो किसी को 200 लाइट दे दी गईं लेकिन नगर परिषद में इस बार शामिल हुए कुछ गांव और बड़े वार्डों सहित शहर मुख्य बाजारों अभी भी लाइटों की आवश्यकता है। नगर परिषद के कमरे में बंद करीब चार हजार लाइटों का अब साल पूरा होने से गांरटी भी खत्म होने वाली है।
बाक्स-
9 करोड़ 66 लाख रुपये था लाइटों का बजट-
शहर में नई लाइट लगवाने के लिए कुल बजट नौ करोड़ 66 लाख रुपये का था। इसमें करीब एक साल पहले एक करोड़ तीस लाख रुपये की लाइट आ चुकी है व अभी और भी आनी बाकी है। इन लाइटों को लगवाने के लिए चार करोड़ 90 लाख रुपये बजट बनाया गया था।
वर्जन-
नगर परिषद में अभी कुछ लाइटें रखी हैं। इनको जल्द ही लगवा दिया जाएगा। इन लाइटों को लगाने के लिए तार व अन्य समान लिए के टेंडर लगाए जाने हैं। इसकी प्रक्रिया चल रही है। -कमलेश सैनी चेयरपर्सन नगर परिषद