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नया सत्र शुरू हुए चार माह बीत गए, 25 हजार विद्यार्थियों को नहीं मिलीं किताबें

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पुरानी सराय स्थित प्राथमिक पाठशाला में कक्षा चौथी के विद्यार्थियों को पढ़ता अध्यापक। - फोटो : Narnol
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नारनौल। सरकार प्राथमिक शिक्षा पर करोड़ों का बजट खर्च कर रही है। इसके बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं नजर आ रहा है। सरकारी प्राथमिक और मिडिल स्कूलों की हालत यह है कि नया सत्र शुरू हुए चार माह बीत गए लेकिन अभी दूसरी, तीसरी, चौथी, सातवीं और आठवीं कक्षा के 25 हजार विद्यार्थियों को पुस्तकें नहीं मुहैया कराई जा सकी है। इसके चलते इन कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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जिले में अब तक कक्षा प्रथम, पांचवीं और छठी कक्षा के लगभग 15 हजार विद्यार्थियों को ही किताबें वितरित की गई हैं। पुस्तकों के अभाव में अध्यापक दूसरी, तीसरी, चौथी, सातवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों को पुरानी किताबों से पढ़ाई करा रहे हैं। प्राथमिक शिक्षा विभाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सरकारी किताबों की प्रिंटिंग से लेकर आपूर्ति में काफी समय निकल जाता है। सरकार इस प्रक्रिया को कम समय में पूरा कराए और यह सुनिश्चित कराए गए सत्र शुरू होने से पहले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में किताबें पहुंच जाएं। ऐसा होने पर ही बच्चों को समय से किताबें मिल पाएंगी।
सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को सरकार की ओर से निशुल्क किताबें दी जाती हैं। कोविड की वजह से दो वर्षों से किताबें नहीं दी जा रही थीं। इस बार सरकार दोबारा किताबें देगी। जिले में लगभग 750 प्राइमरी स्कूलों में लगभग 25 हजार विद्यार्थी और लगभग 120 मिडिल स्कूलों में लगभग 16 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। औसत के हिसाब से कक्षा प्रथम, पांचवीं तथा छठी के लगभग 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों को किताबें दी जा चुकी हैं लेकिन अभी कक्षा दूसरी, तीसरी, चौथी, सातवीं और आठवीं के लगभग 25 हजार विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिल पाई हैं। कई अभिभावकों ने तो पुरानी किताबें ले ली हैं जिससे वो काम चला रहे हैं। कुछ ने नई भी खरीद ली है लेकिन अब भी बहुत बच्चे हैं जिनके पास किताबें नहीं हैं। इस बार आठवीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा भी हो सकती है। ऐसे में आठवीं के विद्यार्थियों को काफी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
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किताबें ही नहीं तो कैसे पढ़ाई करें बच्चे
अभिभावक निर्मला, सविता, पिंकी, सुभाष, मुकेश, कालू आदि ने बताया कि सरकारी स्कूलों में गरीबों के बच्चे पढ़ने जाते हैं। उनके पास इतना धन नहीं होता कि वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा सकें। जुलाई माह बीतने को है और अब तक विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिली हैं। ऐसे में उनके बच्चे कैसे निजी स्कूलों के विद्यार्थियों से स्पर्धा कर सकते हैं। वे भी चाहते हैं कि उनके बच्चे बढ़े होकर अच्छे नागरिक बनें लेकिन जब सरकारी स्कूलों में सुधार ही नहीं होगा तो गरीबों के बच्चे कैसे अधिकारी बन सकेंगे।
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हमारे पास पहली, पांचवीं तथा छठी की किताबें आ चुकी हैं और बच्चों को वितरित कर दी गई हैं। अगले सप्ताह फिर किताबें आ जाएंगी। आने के बाद बचे हुए विद्यार्थियों में वितरित कर दी जाएंगी।- सुनील दत्त, जिला शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़।
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