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Mahendragarh-Narnaul News: धन्यवाद रैली के पोस्टर और बैनरों से पूर्व शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास गायब

Fri, 16 May 2025 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो संख्या:65- सिनेमा रोड पर रेली का फ्लैक्स लगाते श्रमिक--संवाद
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महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ जिले की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। 18 मई को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की महेंद्रगढ़ में होने वाली रैली को लेकर चर्चाओ का बाजार गर्म है।
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रैली का आयोजन स्थानीय विधायक कवर सिंह यादव की अगुवाई में किया जा रहा है। विकास योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के साथ यह रैली राजनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है। विधायक कंवर सिंह यादव द्वारा जारी किए गए रैली के पोस्टरों में कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं को जगह दी गई है।
इनमें केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, भूपेंद्र यादव, डॉक्टर सुधा यादव, हरियाणा सरकार में मंत्री राव नरवीर सिंह व आरती राव सहित जिले के पूर्व मंत्री ओपी यादव और पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव जैसे चेहरे प्रमुख हैं। इतना ही नहीं किरण चौधरी उनकी बेटी श्रुति चौधरी और सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह जैसे नाम भी शामिल किए गए हैं।
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भाजपा के विधायक की ओर से एक समावेशी संदेश देने की कोशिश की गई है, लेकिन इन तमाम चेहरों के बीच पूर्व शिक्षा मंत्री और भाजपा में दक्षिणी हरियाणा के कद्दावर और पांच बार महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की सीट पर विजेता रहे प्रो. शर्मा का नाम और चित्र गायब है। यह वही प्रो. रामबिलाास शर्मा हैं जिन्हें एक दौर में महेंद्रगढ़ भाजपा का प्रमुख चेहरा माना जाता था।
2024 के चुनाव में टिकट कटने के बाद वे अपेक्षाकृत निष्क्रिय दिखे। वर्तमान विधायक कंवर सिंह यादव के चुनाव में भी दूरी बनाए रखी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पोस्टर से बाहर करना केवल संयोग नहीं, बल्कि संदेश है। विधायक कंवर सिंह यादव अब भी शायद उस उपेक्षा को भूले नहीं हैं जो चुनाव के समय उन्हें प्रो. शर्मा की ओर से मिली थी। यह संकेत भी मिल रहा है कि भाजपा में महेंद्रगढ़ के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
हालांकि हाल ही में हुए महेंद्रगढ़ सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चुनाव में प्रो. रामबिलास शर्मा गुट के उनके भाई राजेंद्र शर्मा के चेयरमैन बनने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि गुटबाजी खत्म हो चुकी है। विधायक कंवर सिंह यादव भी मिठाई खिलाते नजर आए थे, लेकिन पोस्टर में प्रोफेसर रामविलास शर्मा की अनुपस्थिति ने फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब एक और बड़ा सवाल यह भी है कि क्या कंवर सिंह यादव, प्रो. रामबिलास शर्मा जैसे वरिष्ठ और वट वृक्ष कहे जाने वाले नेता के बिना भी रैली में भारी भीड़ जुटा पाएंगी? क्या पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में वही जोश नजर आएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों की निगाह इस बात पर भी टिकी है कि कंवर सिंह की व्यक्तिगत पकड़ और रणनीति कितनी कारगर सिद्ध होती है। क्या प्रो. रामबिलास शर्मा मंच सांझा करेंगे। क्या मंच पर आरती राव और उनके विरोधी डॉक्टर अभय सिंह यादव साथ दिखेंगे और सबसे अहम क्या कवर सिंह यादव अपना पोस्टर रैली से पहले बदलेंगे। हालांकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और प्रो. रामबिलास शर्मा के मधुर संबंधों को देखते हुए यह संभव है कि मंच पर रामबिलास शर्मा को स्थान मिले भले ही पोस्टर से गायब रहें। 18 मई की रैली सिर्फ एक विकास कार्यों का उद्घाटन नहीं, बल्कि भाजपा की आंतरिक स्थिति की असली तस्वीर भी सामने लाएगी। यह तय करेगा कि महेंद्रगढ़ में भाजपा संगठित हो रही है या दरारें और गहरी होती जा रही हैं।
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विधान सभा चुनावों के दौरान हुआ था मतभेद:
भाजपा की ओर से विधान सभा चुनावों में महेंद्रगढ़ विधान सभा टिकट के लिए अंतिम समय में प्रो. रामबिलास शर्मा का टिकट काटकर कंवर सिंह यादव को दिया गया था। इसके बाद प्रो. रामबिलास शर्मा चुनाव प्रचार के दौरान भी कंवर सिंह यादव से दूरी बनाते नजर आए थे। जब चुनाव का परिणाम आया तो वर्तमान विधायक कंवर सिंह यादव की ओर से प्रो. रामबिलास शर्मा पर पार्टी से बगावत के भी आरोप लगाए गए थे।
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