मौसम की मार से परेशान किसान अपनी फसल को लेकर अभी भी चिंतित हैं। जिले के 370 गांवों की सुरक्षा केवल आठ दमकलों के हवाले है। वर्तमान में खेतों में गेहूं की फसल तैयार है। बिजली के तारों की स्पार्किंग और अन्य कारणों से लगने वाली आग से निपटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। परेशान किसानों का कहना है कि बुआई के समय बारिश नहीं होने, दस दिन पूर्व अंधड़ और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसल का पता नहीं कितना भाग मंडियों तक पहुंचेगा। अभी भी बारिश और आगजनी का खतरा उनको सता रहा है। कस्बों और गांवों में दमकल की व्यवस्था नहीं होने से किसान परेशान हैं। लोगों का कहना है कि जिले की व्यवस्था केवल आठ दमकलों के हवाले है। ऐसे में किसी हादसे के वक्त गांवों तक दमकल की गाड़ियों को पहुंचने में एक घंटे से भी ज्यादा समय लगेगा। जब तक गाड़ियां पहुंचेंगी तब तक किसानों की मेहनत पर पानी फिर चुका होगा।
पड़ चुकी है किसानों पर मार
इस बार पहले ही किसानों पर मौसम की मार पड़ चुकी है। फसल की बुआई के शुरूआत में बरसात नहीं होने के कारण इस बार फसल काफी कमजोर हैं। जनवरी, फरवरी और मार्च में भी बरसात नहीं हुई। इस कारण गेहूं की फसलों में दाना न के बराबर है। मार्च माह में हुई बरसात और अंधड़ के कारण फसलों को नुकसान भी पहुंचा है।
370 गांवों की सुरक्षा के लिए मात्र आठ गाड़ियां
दमकल विभाग के पास खेतों में खड़ी फसल की सुरक्षा के लिए कोई खास इंतजाम नहीं है। पूरे जिले के 370 गांवों के खेतों की रखवाली मात्र छह गाड़ियों के भरोसे है। इसमें नारनौल दमकल केंद्र पर तीन और महेंद्रगढ़ केंद्र पर पांच गाड़ियां हैं। नारनौल में तीन गाड़ियों की क्षमता करीब 20 हजार लीटर है। इनमें एक बड़ी गाड़ी की स्टोर क्षमता दस हजार लीटर, दो छोटी गाड़ियों की स्टोर क्षमता पांच-पांच हजार लीटर है। महेंद्रगढ़ में पांच-पांच हजार लीटर क्षमता की चार गाड़ियां और एक बड़ी गाड़ी है।
कस्बों और गांवों के पास नहीं हैं दमकल की गाड़ियां
प्रशासन द्वारा गांवों में दमकल की कोई व्यवस्था नहीं की हुई है। नारनौल से नांगल चौधरी कस्बा 26 किलोमीटर, निजामपुर 15 किलोमीटर और अटेली 15 किलोमीटर पड़ता है। वहीं नांगल चौधरी का अंतिम गांव रायमलिकपुर 33 किलोमीटर पड़ जाता है। इसके अलावा नारनौल से निजामपुर का गांव बायल, पाटन, मूसनौत, पांचनौता तो शहर से 35 किलोमीटर दूर पड़ जाते हैं। ऐसे में शहर से वहां तक पहुंचने के लिए दमकल को 40 से 45 मिनट का समय लग जाएगा। दमकल की गाड़ी पहुंचने से पूर्व ही किसानों के अरमान जलकर राख हो चुके होंगे। महेंद्रगढ़ से सतनाली और कनीना के गांव भी करीब इतनी ही दूर पड़ते हैं।
रोड भी नहीं दे रहे किसानों का साथ
दमकल की गाड़ियों के लिए रोड सही होने चाहिए, मगर टूटे रोड भी किसानों का साथ नहीं दे रही। एक फायर बिग्रेड कर्मचारी का कहना है कि वे तो स्पीड से गाड़ी ले जा सकते हैं। जिले के अंतिम गांव तक 25 से 30 मिनट में पहुंच सकते हैं, मगर रोड खराब होने की वजह से उनको गांवों में काफी परेशानी होती है।
कस्बों में होनी चाहिए दमकल की गाड़ियां
गांव मूसनौता, बायल, पांचनौता, सतनाली के गांव श्यामपुरा, जड़वा व अटेली के कांटी, खेड़ी के अमीलाल, सुरेश कुमार, ज्ञानी प्रकाश, जयचंद, जगदीश प्रसाद के अलावा अन्य किसानों का कहना है कि दमकल की गाड़ियों की व्यवस्था कस्बों में भी होनी चाहिए ताकि अप्रिय घटना होने पर तुरंत ही गाड़ियां मौके पर पहुंच जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कस्बों में भी दमकल की व्यवस्था की जाए।
इस तरह बरतें सावधानी
दमकल की गाड़ियां किसानों की पहुंच से दूर हैं, ऐसे में किसानों को ही सावधानी बरतने की आवश्यकता है। किसानों को चाहिए कि वे अपनी फसल बिजली के तार और खंभों के पास न रखें। खेत से जा रही बिजली की लाइन के नीचे फसल की ढेरी न लगाएं, खलिहानों को रेलवे लाइन और आम रास्तों से दूर ही बनाएं, ताकि कोई उन पर ज्वलनशील पदार्थ न डाल सके। यदि खेत से गुजर रहे तार ढीले हैं तो इसकी जानकारी पहले ही बिजली निगम को दें। फसल की कटाई करते और निकालते समय बीड़ी, सिगरेट और हुक्के का प्रयोग न करें।
तीन गाड़ी नारनौल में खड़ी हैं कंडम
एक तरफ जिले में दमकल की गाड़ियों का अभाव है। वहीं नारनौल नगर परिषद प्रांगण में स्थित दमकल विभाग के बाहर तीन गाड़ियां कंडम खड़ी हैं। इन गाड़ियों को ठीक कराने के बाद एहतियात के तौर पर कस्बों में तैनात किया जा सकता है।