महेंद्रगढ़। निजी स्कूलों की ओर से हर वर्ष कक्षा बदलने पर करीब 20 प्रतिशत फीस की वृद्धि के कारण अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ रहा है।
निजी स्कूल भी हर वर्ष सत्र बदलते ही फीस में वृद्धि कर रहे हैं। हालांकि इनकी निगरानी के लिए शिक्षा विभाग की ओर से जिले में किसी भी प्रकार की कोई कमेटी नहीं बनाई गई है जो इनकी नियमानुसार फीस वृद्धि का दायरा तय कर सके। इस समय निजी स्कूलों ने अपने स्टाफ को भी मैदान में उतार दिया है। यह स्टाफ गांव-गांव जाकर अपने स्कूलों की उपलब्धियां गिनवा रहे हैं।
हर साल अभिभावकों से फीस को लेकर भी वायदे किए जाते हैं तथा साधारण फीस बताकर बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिया जाता है। इसके बाद स्कूलों में ही वर्षभर की फीस तय की जाती है तथा देरी से फीस जमा कराने वाले अभिभावकों पर भी फीस जमा कराने के लिए विभिन्न प्रकार के दबाव भी बनाए जाते हैं। एडमिशन के बाद किताबों से लेकर ड्रेस, टाई-बेल्ट व जूते तक निजी स्कूल तय करते हैं। दाखिले से लेकर कक्षा बदलने तक अभिभावकों पर निजी स्कूलों के आर्थिक भार उनकी बजट व्यवस्था को बिगाड़ रहे हैं।