अटेली की रिचा गर्ग महिलाओं को स्वरोजगार के प्रति जागरूक करने के साथ जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा लाने की मुहिम में जुटी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को घूंघट से बाहर निकालकर उन्हें स्वावलंबी बनाने की उनकी पहल नजीर है। जिले के विभिन्न गांवों, शिक्षण संस्थानों और स्लम एरिया में वह अब तक करीब 500 शिविरों का आयोजन कर चुकी हैं। पिता की प्रेरणा से रिचा ने समाजसेवा को ध्येय बना लिया।
हिम्मत बनकर हमेशा मेरे साथ रहे पिता :
रिचा ने बताया कि महिलाओं के लिए अपनी पहचान बनाना बड़ा मुश्किलों से भरा होता है। जब आप कुछ अलग रास्ता चुनते हैं तो आज भी समाज उन महिलाओं का विरोध करता है और महिलाएं इस विरोध से घबराकर अपने कदम पीछे हटा लेती हैं। मेरे साथ भी शुरुआती दौर में यही सब हुआ था परंतु मेरे पिताजी मेरी हिम्मत बनकर हमेशा मेरे साथ रहे और जब भी मेरे ऊपर कोई विपत्ति आई तब उन्होंने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया। पिता ने मुझे समझाया कि किसी जरूरतंतद का सहारा बनना सबसे बड़ा धर्म का कार्य होता है। पिता की सीख को धारण करते हुए हैंडीक्राफ्ट बिजनेस के साथ-साथ ग्रामीण महिलाएं व समाज की जरूरतमंद युवतियों को निशुल्क हस्तशिल्प ज्वेलरी की ट्रेनिंग देना शुरू किया।
अर्थशास्त्र से एमए उत्तीर्ण कर चुकीं रिचा वर्ष 2018 से हस्तशिल्प ज्वेलरी की ट्रेनिंग कैंप लगाकर सेवा में जुटी हैं। रिचा हस्तशिल्प कौशल के लिए न केवल हरियाणा सरकार अपितु विभिन्न संस्थाओं से भी सम्मानित हो चुकी है। रिचा बतातीं हैं एक महिला के लिए इस तरह की सेवा चुनौतीपूर्ण रहती है। मैंने सभी चुनौतियों को मात देते हुए इस सेवा का संकल्प उठाया।
युवा महिला उद्यमी पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुकी है रिचा
महिलाओं को हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ दिव्यांग व जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित कर उन्हें सरकार से मिलने वाली योजनाओं के प्रति भी जागरूक करती हूं। हरियाणा सरकार की ओर वर्ष 2023 में युवा महिला उद्यमी पुरस्कार से सम्मानित करने के साथ जिला प्रशासन की ओर से भी सम्मानित किया जा चुका है। रिचा कहतीं है उन्हें बचपन से ही समाज में कुछ अलग करने का शौक था ताकि की महिलाओं के प्रति लोगों की सोच बदली जा सके। मेरी रुचि जीवन में कुछ अलग करने थी इसलिए हस्तशिल्प के क्षेत्र में अपना कदम बढ़ाया। आज गांव-गांव प्रशिक्षण शिविर लगाकर न केवल हस्तशिल्प के बारे में महिलाओं व युवतियों को जानकारी देती हूं, बल्कि उन्हें स्वावलंबी बनने के लिए भी जागरूक करती हूं।