फोटो नंबर- 10कॉलेज से आने के बाद चाक पर दिये बनाती छात्रा। संवाद
नारनौल। दिवाली पर लोग दीये जलाकर रोशनी का त्योहार मनाते हैं, वहीं कई परिवार इस पर्व का इंतजार इसलिए करते हैं कि दीये बेचकर अपना घर चला सकें। इलेक्ट्रॉनिक सजावट के चलन से इन परिवारों की कमाई घटी है, फिर भी 76 वर्ष के बुजुर्ग से लेकर स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चे तक पूरा परिवार चाक पर जुटा है, ताकि आमदनी बढ़ सके।
बड़ का कुआं मोहल्ले में कुम्हार परिवारों के बच्चे पारंपरिक काम के बजाय दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं। 13 वर्षीय पंकज व 14 वर्षीय कार्तिक सेना में, 14 वर्षीय कोमल शिक्षिका, 15 वर्षीय अर्चना पुलिस और 17 वर्षीय नैंसी व्यापार करना चाहती हैं, ताकि परिवार का जीवन बेहतर बने।
सामान के भाव पर एक नजर
सामान मूल्य
दीया 1 रुपये
करी 2 रुपये
भोलवा 2 रुपये
कलश 30 रुपये
कच्ची पाली 5 रुपये
तूमड़ी 5 रुपये
बड़ा दीया 5 रुपये
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दिवाली की तैयारी दो माह पहले से ही शुरू हो जाती हैं और रोज औसतन 1 हजार दीये बनाते हैं। पिछले कुछ सालों में लागत में तो बढ़ोतरी हुई है लेकिन मूल्य नहीं बढ़ा है। इसलिए परिवार के सभी सदस्य मिलकर काम करते हैं।
-विक्रम, मोहल्ला नलापुर
थोक व खुदरा दोनों काम करते हैं, इस बार करीब 50 हजार दीये बनाए हैं। उम्मीद है व्यापार अच्छा होगा और उचित मुनाफा कमा पाएंगे।
-सोनू, मोहल्ला नलापुर
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मेरी उम्र 76 वर्ष है और 16 वर्ष की उम्र से मिट्टी के बर्तन बना रहा हूं। पहले अनाज के बदले दीये बेचते थे और अब रुपये मिलते हैं लेकिन केवल इतने की करीब 7 से 8 हजार दीये बेचने के बाद करीब 5 हजार रुपये की बचत निकल पाती है।
-लीलाराम, मोहल्ला बड़ का कुआं
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कई लोग घर पर आकर दीये लेकर जाते हैं और करीब 30 घरों में जाकर मैं दीये देकर आती हूं। प्रत्येक घर में औसतन 100 दीये लेते हैं जिससे 3 हजार दीये एक बार में ही बिक जाते हैं। साथ ही अन्य सामान भी बेच पाती हूं।
-कमला देवी, मोहल्ला बड़ का कुआं