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नींबू वर्गीय फलों के पौधों में देशी फुटाव को तुरंत तोड़े किसान: डॉ. मुकेश

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फोटो 5 बाग का निरीक्षण करते सहायक वैज्ञानिक (बागवानी) डाॅ. मुकेश कुमार।स्रोत:प्रशासन
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नारनौल। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल से सहायक वैज्ञानिक (बागवानी) डॉक्टर मुकेश कुमार ने मंगलवार को गांव गढ़ी महासर व राजपुरा गांव के विभिन्न बागों का निरीक्षण किया। साथ ही नींबू वर्गीय फलों के पौधों में देशी फुटाव को तुरंत तोड़ने की सलाह दी। इस मौके पर उन्होंने किसानों को जागरूक करते हुए कहा कि अगर हम देशी फुटाव को समय पर नहीं तोड़ते हैं तो मूल पौधे की जगह देशी पौधे की ज्यादा बढ़वार हो जाएगी। इससे फल की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ेगा।
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उन्होंने सर्दी के मौसम में पड़ने वाले घने कोहरे, धुंध और कड़ाके की सर्दी के कारण सब्जियों व फलों को पाले की वजह से होने वाले नुकसान से फसलों को बचाने के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पाले से सबसे पहले सब्जी वाली फसलों की पत्तियां प्रभावित होती हैं, फूल झुलस कर गिर जाते हैं, फिर टहनियां व बाद में पौध सूखने लगते हैं। इस अवसर पर अटेली उद्यान विकास अधिकारी राहुल कुमार भी मौजूद रहे।

ऐसे करें बागवानी फसलों का बचाव
मौसम विभाग से पाला पड़ने की सूचना मिलते ही फसलों में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए, जिससे तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरेगा और फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाएगा।
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घुलनशील गंधक का छिड़काव जब पाला पड़ने की संभावना हो उन दिनों दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। जरूरत पड़ने पर फफूंदनाशक रसायन का छिड़काव करें।

लो-टनल तकनीक का इस्तेमाल करें, इससे कम होगा नुकसान :

दिसंबर के अंत में सिट्रस के पौधों की ट्रेनिंग व प्रूनिंग करके खाद अवश्य डालें। बेर के पौधों में पाउडरी मिल्डयू से बचाव के लिए सल्फैक्स दो ग्राम प्रति लीटर और फल मक्खी से बचाव के लिए 1 एमएल रोगोर प्रति लीटर की स्प्रे करें। आंवला की तुड़ाई समय पर करें।
बागवानी तकनीकों पर अनुदान का भी प्रावधान
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि यदि कोई किसान सब्जी की खेती मल्चिंग, लो-टनल, टपका सिंचाई, मिनी स्प्रीकंलर या बेल वाली सब्जी की खेती बांस के सहारे करता है तो उसको सरकार द्वारा 15 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान दिया जाता है।
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