नारनौल। जिले के कुछ गांवों में ग्रास हॉपर कीट देखे गए हैं। इसे किसान टिड्डी ना समझें। देशी भाषा में किसान इसे रामजी की गाय भी कहते हैं। इस कीट को बड़ी आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इस संबंध में कृषि अधिकारियों ने विभिन्न गांव का दौरा कर इस बात को पुख्ता किया है कि यह केवल ग्रास हॉपर है।
जिला उप कृषि निदेशक डॉ. बलवंत सहारण ने बताया कि जिले के गांव धानोता, मेघोत हाला, दोस्तपुर, शाहबाजपुर आदि गांव में जो खेत बंजर जमीन या पहाड़ी के नजदीक है वहां ग्रास हॉपर का आक्रमण देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि कुछ किसान इसे टिड्डी समझ रहे हैं। यह टिड्डी नहीं है। उन्होंने बताया कि यह कीट सर्वप्रथम चारा वाली फसल ज्वार पर आता है। इसके बाद धीरे-धीरे बाजरा फसल पर भी आ जाता है और पत्ती खाकर नुकसान करता है। इस कीट को बड़ी आसानी से कीटनाशक सामूहिक रूप से छिड़ककर नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस कीट को नियंत्रण करने के लिए क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत की 500 मिलीलीटर मात्रा या साइपरमेथ्रिन 25 प्रतिशत की 100 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। किसान छिड़काव के दौरान हवा की दिशा का विशेष ख्याल रखें। जिस खेत में दवाई छिड़की है उस खेत की फसल को कम से कम 15 दिन तक मवेशियों को ना खिलाएं। इन सभी बातों का किसान जरूर ख्याल रखें। 15 दिन से पहले दवाई छिड़काव किए हुए खेत की फसल खाने से पशु बीमार पड़ सकते हैं।