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Mahendragarh-Narnaul News: डीएपी के लिए किसानों ने किया हंगामा, बुलानी पड़ी पुलिस

Sun, 27 Oct 2024 12:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो नंबर-14खाद के लिए शोर मचा रहे किसानों को शांत करता पुलिस कर्मी। संवाद
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नारनौल। आखिरकार दो सप्ताह बाद जिले में डीएपी खाद के बैग पहुंच गए। इससे किसानों ने थोड़ी राहत की सांस ली, लेकिन डीएपी आने की सूचना मिलते ही किसानों की भारी भीड़ पहुंच गई। मौके पर कुछ किसान हंगामा भी करने लगे। इसकी वजह से कोऑपरेटिव के बाहर अव्यवस्था फैल गई। सोसायटी के कर्मचारियों को पुलिस को बुलानी पड़ी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर किसानों की लाइन लगवाई तब जाकर खाद वितरित की गई।
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शुक्रवार देर रात कोऑपरेटिव सोसायटी नारनौल में 2000 बैग डीएपी के पहुंचे थे, जिसके लिए शनिवार सुबह से किसानों की लाइन लगनी शुरू हो गई। खाद लेने आए किसान लाइन में लगे हुए एक दूसरे से आगे निकलने के लिए हंगामा भी करते रहे और व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। किसानों ने बताया कि एक आधार कार्ड पर केवल 3 डीएपी के बैग दिए गए। किसानों का कहना है कि गेंहू व सरसों की अच्छी पैदावार के लिए डीएपी की जरूरत है। किसानों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि खाद वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, ताकि बिना किसी परेशानी के सभी को खाद मिल सके।

यूरिया के लिए किसानों को करना पड़ता है संघर्ष
क्षेत्र में किसान सरसों और गेंहू की बीजाई के समय डीएपी और फसल पकने से पहले यूरिया खाद का छिड़काव करते हैं। किसानों का कहना है कि डीएपी की तरह यूरिया के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसका कारण यह है कि डीएपी और यूरिया सरकारी रेट पर केवल सरकारी केंद्र पर मिलता है, जिसका स्टॉक सीमित मात्रा में रहता है। वहीं गांवों में स्थित सरकारी दुकानों पर अगर डीएपी और यूरिया की उपलब्धता होती है तो उनके दाम सरकारी रेट से अधिक रहते हैं। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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डीएपी के लिए सुबह 4 बजे अनाज मंडी पहुंच गए थे, ताकि अधिक भीड़ रहने पर आसानी से बैग प्राप्त हो सकें। एक आधार कार्ड पर केवल 3 बैग मिल रहे हैं। मुझे 4 बैग की आवश्यकता है, इसलिए एक बैग के लिए परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
मनोज कुमार, गांव टहला।
घर के सभी काम छोड़कर सुबह जल्द ही अनाज मंडी आ गई थी। घंटों लाइन में लगने के बाद डीएपी खाद मिला है प्रशासन से अपील है कि खाद वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाए जाए ताकि किसानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
कमली, गांव ताजीपुर।
खाद के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, हमेशा डीएपी और यूरिया के लिए इसी तरह लाइन में लगना पड़ता है। सरकारी केंद्र के अलावा अगर खाद अन्य स्थानों पर मिल रही है तो उसके दाम सरकारी रेट से ज्यादा हैं।
पूनम देवी, गांव सराय बहादुर
मेरी उम्र 74 वर्ष है और डीएपी खाद लेने के लिए मैं कुछ देर तक लाइन में खड़े रहे, लेकिन जैसे ही भीड़ बढ़ने लगी लाइन में खड़ा रहना दूभर हो गया। प्रशासन से अपील है कि गांवों के हिसाब से खाद का वितरण किया जाए, ताकि सभी गांवों के सभी किसानों आसानी से खाद मिल सके।
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जगमाल सिंह, गांव सेका
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