महेंद्रगढ़। केंद्र सरकार की ओर से मोटे अनाज पर विशेष ध्यान देने के बाद क्षेत्र के किसानों को भी इसका लाभ मिल रहा है। बाजरे का अच्छा भाव मिलने से किसान मंडियों की भागदौड़ से बचने के लिए खेतों से सीधे व्यापारियों को बाजरा बिक्री कर रहे हैं। खेतों से अच्छे भाव के कारण अब मंडियों में भी आवक कम हो गई है।
समर्थन मूल्य 2625 रुपये है, लेकिन सीधे खेत से करीब 2575 रुपये तक का भाव मिल रहा है। किसान मंडियों तक पहुंचने की मजदूरी एवं वाहनों के किराए के रूप में प्रति क्विंटल पर होने वाले खर्च से भी बच रहा है। ऐसे में किसान भी खेतों से सीधे व्यापारियों को बाजरा बेच रहे हैं।
- सीधे खेत से उठ जाती है फसल
बाजरे की कढ़ाई के बाद व्यापारी सीधे खेत से उपज उठा लेते हैं। इस बार भाव भी अच्छा मिल रहा है। कनीना मंडी की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। मंडी तक उपज को पहुंचाने के लिए पहले खेत से वाहनों में भरना पड़ता है। इसके बाद घर पर बोरियों में भरना, मंडी तक पहुंचने के लिए वाहन करना काफी महंगा पड़ता है। उपज को मंडी तक पहुंचाने के लिए तीन से चार हजार रुपये खर्च हो जाते हैं।
-देवेंद्र सिंह, किसान अगिहार
- मजदूरी की पड़ती है अतिरिक्त मार
खेत में फसल निकालने के बाद मंडियों तक पहुंचाने में काफी समय व मजदूरी लगती है। जब खेत से ही अच्छा भाव मिल रहा है तो किसान का भी समय बच जाता है। मंडी में पहुंचने के लिए किसानों को भी एक दिन पूर्व तैयारी करनी पड़ती है जिससे काफी समय लगता है। खेत से अच्छा भाव मिल जाता है, जिससे भागदौड़ भी नहीं होती।
- रामनिवास, किसान गांव सिगड़ा
-अबकी बार मिल रहा अच्छा भाव
समर्थन मूल्य 2625 रुपये है, लेकिन जब खेत से ही 2500 रुपये से अधिक भाव मिल रहा है तो इससे मंडी तक पहुंचने में होने वाले खर्च से भी छुटकारा मिल रहा है। किसान अपना बचा हुआ समय अपने खेतों की तैयारियों में देता है, जिससे समय पर सरसों की बिजाई कर पाएगा। खेत से उपज मंडियों तक पहुंचाने में मजदूरी, वाहन पर काफी खर्च होता है और समय भी बर्बाद होता है। जब सीधे खेत से अच्छे भाव मिल रहे हैं तो अतिरिक्त समय खेतों की तैयारी में लगाएगा।
-संदीप सिंह, किसान गांव अगिहार
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- समय की होगी बचत, कपास चुनाई व खेतों की तैयारी में मिलेगी मदद
इस समय सरसों की बिजाई, कपास की चुनाई व अन्य कृषि कार्याें में किसान काफी उलझा हुआ है। समय का अभाव होने के कारण समय पर सरसों की बिजाई करना मुश्किल हो रहा है। वहीं मजदूरों की कमी ने समस्या और अधिक बढ़ा दी है। ऐसे में खेत से ही उपज बिक्री करने से समय की बचत होगी।
- लक्ष्मण, निवासी सिगड़ा