फोटो नंबर- 16नई अनाज मंडी में बोली लगाकर बाजरे की खरीद करते व्यापारी। संवाद
नारनौल। बाजरे की सरकारी खरीद शुरू हुए सात दिन बीत गए लेकिन मंडियों में अब भी कई किसानों को गेटपास नहीं मिल पा रहे। ज्यादातर किसान जितना बाजरा लेकर आ रहे हैं, उसका आधा ही बेच पा रहे हैं। वजह यह है कि अधिकतर किसानों का डाटा ई-खरीद पोर्टल पर अब तक अपडेट नहीं हुआ है और कुछ का डाटा अधूरा ही चढ़ा है।
जिन किसानों के गेटपास जारी हो रहे हैं, उन्हें भी बाजरा एमएसपी से कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। हैफेड केवल इलेक्ट्रिक झरने से साफ किया हुआ बाजरा खरीद रही है। झरने की मजदूरी ज्यादा होने के कारण किसान हैफेड को बेचने से बच रहे हैं।
सरकारी खरीद न होने से खुली मंडी में भी भाव कम बने हुए हैं। व्यापारी जे-फार्म के तहत केवल 2200 से 2240 रुपये के भाव पर खरीद रहे हैं। इस वजह से भावांतर के 600 रुपये जोड़कर भी किसानों को 2900 रुपये एमएसपी नहीं मिल पा रही।
रोज औसतन 8 क्विंटल बाजरा खरीद रही हैफेड
हैफेड की ओर से अब तक नांगल चौधरी में 20.5 क्विंटल और नारनौल में 37 क्विंटल बाजरे की खरीद की गई है। खरीद केवल इलेक्ट्रिक झरने से सफाई के बाद ही हो रही है लेकिन इसमें मजदूरी और कटौती मिलाकर करीब 150 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है। इसके चलते किसानों को 2300 रुपये के बाजार भाव और 600 रुपये भावांतर मिलने के बाद भी प्रति क्विंटल 2900 रुपये से कम ही भाव मिल पाता है।
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सुबह 35 क्विंटल बाजरा लेकर मंडी पहुंचा था लेकिन ई-खरीद पोर्टल पर केवल 11 क्विंटल बाजरा ही अपडेट दिखा। मैंने एमएफएमबी पोर्टल पर 5 एकड़ जमीन का पंजीकरण करवाया था लेकिन 4 एकड़ का डाटा अभी अपडेट होना बाकी है। बाकी बाजरे का क्या करें, समझ नहीं आ रहा।
-रामकिशन, किसान, गांव कारोता
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इलेक्ट्रिक झरने से बाजरे की कटौती भी ज्यादा होती है और मजदूरी भी ज्यादा लगती है। इसी वजह से मैंने व्यापारियों की बोली पर बाजरा बेचा। मेरा बाजरा 2240 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिका। भावांतर के 600 रुपये मिलने के बाद भी एमएसपी से कम पर ही बाजरा बेचना पड़ रहा है।
-महेंद्र सिंह, किसान, गांव सिरोही बिहाली
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वर्जन :
जिले में 1 लाख 47 हजार एकड क्षेत्र का मिसमैच डाटा अपडेट किया जाना था। अधिकतर कार्य पूरा किया जा चुका है। अगर किसी किसान को समस्या है तो कार्यालय में संपर्क कर सकता है।
-राकेश कुमार, डीआरओ, नारनौल।