एक बार फिर प्राकृतिक आपदा किसानों के लिए मुसीबत बन कर बरसी। इस वर्ष भी प्राकृतिक आपदा पिछले वर्ष की तरह इस बार भी किसानों के मुंह का निवाला छीनने का काम किया है। सतनाली कस्बे के गांव श्यामपुरा में शनिवार की सुबह 20 मिनट हुई ओलावृष्टि से किसानों की गेहूं एवं सरसों की फसलें तबाह हो गई हैं। खेतों में ओलावृष्टि के रूप में सफेद चादर बिछ गयी थी जिसे देखकर किसान बड़े मायूस हुए। किसानों के अनुसार ओलावृष्टि से 50 प्रतिशत से अधिक सरसों का नुकसान हुआ है जबकि गेहूं का नुकसान कम हुआ है।
प्रशासन की ओर से हलका पटवारी सुरेंद्र सिंह, एवं गिरदावर नरेश मौके पर पहुंचकर नुकसान हुई फसलों का जायजा लिया। इस मौके पर शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा के पुत्र गौतम शर्मा स्थानीय विधायक के प्रतिनिधि के तौर पर गांव श्यामपुरा जाकर किसानों से मिले और किसानों को सरकार से मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर उनके साथ भाजपा युवा नेता सवाई सिंह राठोर, डॉ. तरुण एवं ग्रामीण थे। इसके अलावा गांव पालड़ी पनिहार में सामान्य ओलावृष्टि हुई जिससे फसलें प्रभावित नहीं हुई। इसकी सूचना शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा के पास पहुंची तो उन्होंने जिला उपायुक्त राज नारायण कौशिक को फोन से बातचीत की।
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20 मिनट में मचाई तबाही
गांव श्यामपुरा में 2 से 3 किलोमीटर दूरी पर शनिवार की सुबह 3.45 बजे जबरदस्त ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि लगभग 20 मिनट तक हुई जिससे किसानों के खेत ओलों से भर गए थे। 20 मिनट की ओलावृष्टि से खेतों में सफेद चादर बिछ गई। इतनी ही देर में ओलावृष्टि ने किसानों की 50 प्रतिशत से अधिक फसलों को तबाह कर दिया। ओलावृष्टि से आसपास के 300 से 500 एकड़ भूमि पर फसलें प्रभावित हुई हैं। ओले दोपहर 12 बजे तक भी नहीं पिंघले थे जिनका आकर नींबू के बराबर तथा वजन लगभग 50 ग्राम तक था।
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फसल होगी 5-6 दिनों में रिकवर
इस संदर्भ में कृषि वैज्ञानिक डॉ. रमेश ने बताया कि इस समय गेहूं की प्रारभिंक अवस्था है। इसलिए गेहूं का ओलों पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। 4-5 दिन बाद गेहूं की फसल रिकवर हो जाएगी। ओलों से सरसों की फसल पर नुकसान होगा। सरसों की फसल पर फलियां आ गई हैं, वो फलियां अधिक विकसित नहीं हो पाएंगी जितनी उनको होना चाहिए। अगर तीन-चार दिन धूप खिलती रही तो फसलों की भरपाई हो जाएगी।
किसानों ने की मुआवजे की मांग
ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के लिए किसानों ने प्रदेश सरकार से मुआवजे की मांग की है। किसान श्रीकिशन, शक्ति सिंह, रोशन, राजू वालिया, लालाराम यादव ने बताया कि शनिवार की सुबह 3.45 पर हुई ओलावृष्टि से 50 प्रतिशत से अधिक सरसों की फसल नष्ट हो गई है। इसके अलावा 30 से 40 प्रतिशत गेहूं की फसलों का भी नुकसान हुआ है। किसानों ने बताया कि खेती ही उनका सबकुछ है जिससे वे अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। ओलावृष्टि ने उनके मुंह से उनका निवाला छीन लिया। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए खेती अब घाटे का सौदा हो गई है। वर्ष में एक ही फसल किसानों की मिलती है जबकि एक फसल प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ जाती है।
पालड़ी में भी हुई ओलावृष्टि
गांव पालड़ी पनिहार में शुक्रवार की रात्रि को ओलावृष्टि हुई । किसान महिपाल, हवा सिंह के अनुसार यह सामान्य ओलावृष्टि थी इससे फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। रात्रि 12.30 बजे 10 मिनट हुई ओलावृष्टि में कंचे साइज के ओले पड़े थे। जो सुबह तक फसलों एवं कच्ची जगह पर देखे गए। जबकि महेंद्रगढ़ एवं आसपास के ईलाकों में बूंदाबांदी हुई और ठंड बढ़ गई।
ठंड से सिकुड़े लोग
आसपास गांव में हुई ओलावृष्टि एवं बूंदाबांदी से क्षेत्र में ठंड बढ़ गई। शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्शियस व न्यूनतम तापमान 9.5 डिग्री सेल्शियस रहा। इसके साथ ओलों की ठंड एवं शीत लहर ने क्षेत्र के लोगों को सिकोड़ कर रख दिया। सुबह से ही आकाश में बादल छाए रहे और शाम तक शीत लहर चलती रही जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित रही। लोगों ने ठंड से बचाव करने के लिए अलाव का सहारा लिया।