अनाज मंडी में किसानों के ट्रैक्टर से ही बाजरा सीधे सरकारी बोरों में भरा जा रहा है। ढेरी लगाने, सफाई कराने और नमी नापने की प्रक्रिया को नहीं अपनाया जा रहा। बावजूद इसके कि सरकार तुलाई, सफाई और सिलाई सहित अन्य कार्य के लिए आढ़तियों को प्रति क्विंटल 50 रुपये अदा कर रही है।
महेंद्रगढ़ की अनाज मंडी में बाजरे को सीधे ही सरकारी बोरों में डाला जा रहा है। नियम के अनुसार बाजरे को पहले ढेरी बनाकर डाला जाएगा। इसके बाद इसकी सफाई कराई जाएगी। मंडी अधिकारियों की ओर से इसकी नमी की जांच की जाएगी। इसके बाद तुलाई कर इसे वेयर हाउस या हैफेड की ओर से दिए गए बोरों में पैक किया जाना चाहिए। इन कार्यों के लिए सरकार आढ़ती को 2.5 प्रतिशत का आढ़त दी जाती है। बाजरा 2000 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है। इस हिसाब से बाजरे के एक क्विंटल पर 50 रुपये आढ़ती को दिए जाते हैं। इसके बाद भी बाजरा की खरीद की प्रक्रिया को पूरा करने की बजाए उसे सीधे तौर पर पैक किया जा रहा है। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को मंडी में मुआयना किया तो चार जगह पर सीधे बाजरा पैक किया जा रहा था। मंडी में अब तक एक लाख 36 हजार क्विंटल बाजरे की खरीद हो चुकी है। इसमें एक लाख बैग खाद्य आपूर्ति विभाग ने खरीदा है। अब हैफेड व वेयर हाउस बाजरा खरीद रहे हैं। इसमें दोनों एजेंसी एक- एक दिन कर बाजरा खरीद कर रही हैं।
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इस संबंध में शिकायत मिली थी। हम जांच करने के लिए भी गए थे। सभी आढ़तियों को सख्त हिदायत भी दी गई है। अगर किसी ने बाजरा को सीधे पैक कराया तो उनको नोटिस देंगे। ऐसे बाजरे को रिजेक्ट किया जा सकता है।
-आनंद यादव, खरीद अधिकारी, वेयर हाउस महेंद्रगढ़।
बीएसएनएल ब्राडबैंड में दिक्कत से आई परेशान
बीएसएनएल ब्राडबैंड में दिक्कत रहने के कारण बुधवार को किसानों को टोकन कटवाने के लिए तीन से चार घंटे इंतजार करना पड़ा। इस दौरान मार्केट कमेटी सचिव ने उच्च अधिकारियों से बातचीत कर निजी कंपनी का नेटवर्क प्रयोग कर टोकन कटवाने की प्रक्रिया शुरू की। इंटरनेट धीरे चलने के कारण टोकन कटने की प्रक्रिया बहुत धीरे चली। दोपहर बाद में पोर्टल ठीक हो गया था। उसके बाद किसानों के टोकन तेजी से काटे गए। बुधवार को लगभग 330 टोकन काटे गए। पिछले कई दिनों से महेंद्रगढ़ मंडी में बाजरे की खरीद की जा रही है। बुधवार को महेंद्रगढ़ गांव बारड़ा और ढाणा के किसानों का बाजरा खरीदा जाना था। इन गांवों के किसान सुबह 9 बजे ही टोकन कटवाने के लिए अनाज मंडी में आ गए थे। सुबह ही ब्राडबैंड में खराबी आने के कारण पोर्टल शुरू नहीं हो पाया था। किसान लगभग दो से तीन घंटे तक टोकन कटवाने के लिए लाइन में खड़े रहे। कर्मचारियों ने इसकी सूचना मार्केट कमेटी सचिव नुकुल यादव को दी। सचिव नुकुल यादव ने उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कमेटी सचिव ने कर्मचारियों को निजी कंपनी के ब्राडबैंड से काम शुरू करने के आदेश जारी किए। नेट धीरे चलने के कारण कार्य तेज गति से नहीं हो पा रहा था। एक टोकन पर दस से पंद्रह मिनट लग रहे थे। दोपहर एक बजे बाद पोर्टल शुरू हो गया था।
बोले लोग- घंटों उठानी पड़ी परेशानी
-सुबह 9 बजे आया था। टोकन कटवाने लगा तब ऑनलाइन नहीं होने की बात कही गई। 2-3 महीने पहले करवाया था ना तो मैसेज आया और न ही इंटरनेट पर दिखाया गया। कोई नहीं बता रहा कि अब क्या करूं।
-राम सिंह, खेड़की ।
-सुबह 8 बजे से लाइन में खड़ा हूं। जब मेरा नंबर आया तो नेट चलना बंद हो गया था। फिर बाद में लाइट नहीं होनी की बात कही गई। अब बाजरा नहीं बिक पाया। सरसों की बिजाई के लिए काम करना था।
- सजंय, लावन।
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दस किले बाजरे पर 3 क्विंटल पास दिखाया गया। अधिकारियों से मिले तो उन्होंने कहा कि जो रिकार्ड हो गया, उसे ही पास माना जाएगा। दस एकड़ के बाजरे को अब मार्केट में बेचना पड़ेगा। जिसके आधे दाम भी नहीं मिल पाएंगे।
-सूरत सिंह, मालड़ा बास।
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पटवारी को ऑनलाइन 2 एकड़ बाजरे की फसल चढ़ानी थी, लेकिन रिकार्ड में एक एकड़ बाजरे की फसल चढ़ाई गई। पटवारी से मिले उन्होंने कहा कि जो हमने करना था वो कर दिया, अब कुछ नहीं कर सकते। अब बाकी का बाजरा कहां बेचेंगे।
-सुरेश शर्मा, लावन।