नारनौल। सरकार यूपीआई भुगतान पर शुल्क को बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं पर पड़ने वाले करीब 20 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक बोझ को उपयोगकर्ताओं से वसूलने का कदम बता रही है। जहां तक उपभोक्ताओं पर इसके प्रभाव की बात है तो प्रत्यक्ष रूप से उन्हें यह भुगतान नहीं करना पड़ेगा लेकिन अप्रत्यक्ष प्रभावों से इन्कार नहीं किया जा सकता। व्यापारी निश्चित रूप से इस भार का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालेंगे। मौजूदा लेनदेन की संख्या में कमी की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता। लक्ष्मीनारायण, अर्थशास्त्री