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Mahendragarh-Narnaul News: उम्मीदें...नए साल में अक्षर ज्ञान को मजबूत बनाने पर जोर देगा शिक्षा विभाग

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फोटो नंबर-25राजकीय स्कूल की लैब में अध्ययन करते विद्यार्थी। संवाद
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नारनौल। नए वर्ष के लिए शिक्षा विभाग ने योजनाओं पर कार्य आरंभ कर दिया है। एफएलएन के तहत अक्षर ज्ञान को मजबूत बनाने, रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में वृद्धि लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग की कोशिश रहेगी कि बीते वर्ष की कमियों की भरपाई की जाए और जिले को राज्य के अग्रणी जिलों की श्रेणी में शामिल किया जा सके।
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नए वर्ष 2026 के आगमन के साथ जिले की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग अपने लक्ष्यों को कितना सार्थक रूप दे पाता है और क्या आने वाला वर्ष जिले की शिक्षा प्रणाली के लिए नई दिशा और नए आयाम लेकर आएगा।
महेंद्रगढ़ जिले में गत वर्ष शिक्षा दीपक तो प्रज्वलित रहा लेकिन उसकी रोशनी अपेक्षित रूप से नहीं फैल पाई। शिक्षा विभाग द्वारा कई स्तरों पर सुधार के प्रयास हुए किंतु विभिन्न कारणवश अनेक कार्य अधूरे रह गए।
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जिले के कई विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की कमी, भवन निर्माण में देरी, बैंचों की कमी, मरम्मत कार्य लंबित रहने जैसे मुद्दे पूरे वर्ष चर्चा में रहे। कुछ विद्यालय भवन न बनने के कारण दूसरे विद्यालयों में संचालित होते रहे, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हुई।
इस दौरान जिले में परीक्षा परिणाम भी चिंता का विषय बना। वर्ष 2024-25 की बोर्ड परीक्षाओं में महेंद्रगढ़ जिला अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका। बारहवीं कक्षा में जिले की रैंकिंग 15वें पायदान पर पहुंच गई। कुल 7,128 विद्यार्थियों में से 6,225 ही उत्तीर्ण हो पाए और पास प्रतिशत 84.47 रहा जो पिछले वर्ष के 92.99 प्रतिशत की तुलना में काफी कम है।
यह गिरावट केवल आंकड़ों का फर्क नहीं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। राज्यस्तरीय शिक्षा रैंकिंग में जिले को परचेष्टा-1 ग्रेड प्राप्त हुआ, जिसे औसत उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि कुछ क्षेत्र सकारात्मक भी रहे। राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर रही और अधिकांश स्कूलों में शिक्षक संख्या पर्याप्त रही। विज्ञान एवं अन्य प्रयोगशालाओं में आवश्यक उपकरण उपलब्ध मिले। वहीं पुस्तकालयों में जरूरत के अनुसार पुस्तकें भी जुटाई गईं। विभाग के अनुसार यह प्रयास आने वाले वर्षों में शिक्षा गुणवत्ता सुधार की दिशा में आधार प्रदान करेंगे।
बसों व खेल की दी गई सुविधा
जिले में शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने के लिए मॉडल व पीएमश्री स्कूलों में बसों की सुविधा भी इस वर्ष से शुरू की गई। इस परिवहन सुविधा को जरूरतमंद परिवारों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मना जा रहा है। इसके अलावा शहर के कुछ स्कूलों में खेल जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया गया। इनमें मॉडल संस्कृति स्कूल व कांवी स्कूल सहित कई ऐसे स्कूल है जिनमें खेल के लिए अच्छे मैदान भी है।
जिले में स्कूलों की संख्या
जिले में राजकीय स्कूलों की बात की जाए इनमें 123 सीनियर सेकंडरी स्कूल, 32 हाई स्कूल, 115 मिडिल स्कूल व 457 प्राइमरी स्कूल चल रहे हैं।
उपलब्धियां

इस साल राजकीय महाविद्यालय को मॉडल महाविद्यालय का दर्जा मिला
इस वर्ष राजकीय महाविद्यालय को मॉडल महाविद्यालय का दर्जा दिया गया व पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स भी शुरू किया गया है। राजकीय महाविद्यालय में एक खेल स्टेडियम व 12 कमरों का एक नया ब्लॉक बनाने की मुख्यमंत्री की ओर से घोषणा की गई है। इसके अलावा महिला कॉलेज में सुरक्षा की दृष्टि से चहारदीवारी को नया बनवाने की घोषणा भी की गई है।
वर्जन
नए वर्ष में हमारा उद्देश्य बेहतर परीक्षा परिणाम लाना रहेगा। इसके लिए अथक प्रयास किए जा रहे हैं। नए वर्ष में अक्षर ज्ञान सहित रोजगार परक शिक्षा को लेकर भी कदम उठाए जाएंगे। राजकीय स्कूलों में गत वर्ष जो कमियां रही उनको इस वर्ष पूरा करने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। -बिश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल।
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