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Mahendragarh-Narnaul News: सेना के कारगिल फतह से हर इंसान गर्व कर रहा था

Sat, 26 Jul 2025 12:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो नंबर- 28संवाद कार्यक्रम में उप​स्थित लोग। संवाद
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नारनौल। जिले में पूर्व सैनिकों और आमजन के साथ केशव नगर में कप्तान जगराम आर्या के निवास पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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इसमें 60 दिनों तक चले कारगिल युद्ध से भारतीय सेना की बहादुरी और विजय पर चर्चा की गई। कहा कि बोफोर्स तोप ने कारगिल युद्ध में विजय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त की थी। भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच युद्ध लगभग 60 दिनों तक चला था। 26 जुलाई के दिन उसका अंत हुआ।
युद्ध में भारतीय सेना के जवानों ने बहादुरी का परिचय दिया और कारगिल की पहाड़ियों पर तिरंगा फहराया। कारगिल युद्ध को 26 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन भूतपूर्व सैनिकों और क्षेत्र के लोगों के जेहन में अब भी युद्ध के किस्से याद आते हैं।
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पूर्व सैनिक जगराम आर्य ने कहा कि समझौते को तोड़ते हुए पाकिस्तानी फौज ने कारगिल की पहाड़ी पर कब्जा जमा लिया था। इसके जवाब में भारतीय सेना ने बहादुरी दिखाते हुए पाकिस्तानी फौज को मुंहतोड़ जवाब दिया। 26 जुलाई को पाकिस्तानी सेना को खदेड़ कर तिरंगा फहराया। कारगिल युद्ध के दौरान मैं सेना में कार्यरत था और युद्ध को बहुत नजदीक से देखा। हर सैनिक की तरह कारगिल विजय हमेशा जीवन के सबसे बेहतर अनुभव में से एक है।

पूर्व सूबेदार संतोष कुमार का कहना है कि कारगिल युद्ध के दौरान तैनाती पुणे में थी। उनका काम हथियारों की मरम्मत करना था। कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना पहाड़ पर थी। भारतीय सेना नीचे। इस कारण पाकिस्तानी सेना को फायदा मिल रहा था। युद्ध के दौरान बोफोर्स तोप की मदद से भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना पर गोले बरसाए। रात में अंधेरे का फायदा उठा कर भारतीय जवान बहादुरी से पहाडी के शिखर तक पहुंचने में कामयाब रहे। बोफोर्स तोप ने विजय दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

एलआईसी पूर्व प्रशासनिक अधिकारी ओम प्रकाश ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान एलआईसी में कार्यरत था। याद है कि एलआईसी शहीद जवानों को क्लेम देने के लिए बहुत कम औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं। वहीं एलआईसी द्वारा सैनिकों के परिवारजनों की हर संभव मदद की जा रही थी। सेना सीमा पर लड़ रही थी और लोग सेना के साथ खड़े थे।
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नारनौल के ही बुधराम शर्मा का कहना है कि उन दिनों सोशल मीडिया नहीं था। टीवी बहुत कम घरों में थे। लोग युद्ध की खबरें रेडियो के माध्यम से चौपाल पर बैठकर सुनते थे। चर्चा करते थे। याद है कि उनके गांव के कई युवा युद्ध में शामिल होने के लिए तैयार थे। इस दिन सेना ने कारगिल पर फतह प्राप्त की लोगों में जश्न का माहौल था।
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