फोटो 13डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के बारे में जानकारी देते अतिरिक्त उपायुक्त उदय सिंह।स्रोत डीआईप
नारनौल। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत सरकार कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचा (एग्री-स्टैक) तैयार कर रही है। इसके तहत प्रत्येक किसान को आधार कार्ड की तर्ज पर एक विशिष्ट डिजिटल पहचान दी जाएगी। बुधवार को लघु सचिवालय के मीटिंग हॉल में मास्टर ट्रेनर्स, राजस्व व कृषि विभाग के अधिकारियों की वर्कशॉप आयोजित की गई।
इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त उदय सिंह ने बताया कि इस डिजिटल क्रांति के जरिए किसानों की आईडी को भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जियोग्राफिक जानकारी सहित खेत की सटीक लोकेशन और सीमा का विवरण दर्ज किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से फसल डाटा तैयार होगा जिससे यह पता चलेगा कि किस किसान ने अपने खेत में कौन सी फसल उगाई है। इसका सटीक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।
उन्होंने बताया कि जिस तरह यूपीआई और आधार ने बैंकिंग पहचान को आसान बनाया है। इसी प्रकार एग्री-स्टैक खेती से जुड़ी जानकारी और सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लेकर आएगा।
इस मौके पर एसडीएम महेंद्रगढ़ कनिका गोयल, एसडीएम नारनौल अनिरुद्ध यादव, जिला राजस्व अधिकारी राकेश कुमार व डीडीए डॉ. देवेंद्र सिंह के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
एग्री-स्टैक लाएगा बदलाव
यह डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार होने के बाद पीएम-किसान जैसी योजनाओं और सब्सिडी का पैसा बिना किसी बिचौलिये के सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा। बैंकों के पास किसान की जमीन और फसल का डिजिटल रिकॉर्ड होगा जिससे लोन लेना बहुत आसान और जल्द मिलेगा। मौसम, कीटों के हमले और मिट्टी की सेहत के आधार पर किसानों को उनके मोबाइल पर व्यक्तिगत सलाह मिल सकेगी। फसल नुकसान होने पर डिजिटल डेटा के आधार पर बीमा का क्लेम जल्दी और बिना भ्रष्टाचार के मिल सकेगा। किसान सीधे खरीदारों से जुड़ सकेंगे जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।