नारनौल। नगर परिषद शहर की सफाई के लिए हर महीने करीब 75 लाख व सालभर में आठ से दस करोड़ रुपये खर्च करती है। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था में अपेक्षाकृत सुधार नहीं हुआ।
नगर परिषद द्वारा हर महीने घर-घर कूड़ा उठान करने वाली कंपनी को करीब 27 लाख रुपये दिए जाते हैं, जो घर-घर कूड़ा लेने के अलावा करीब 30 प्वाइट पर से कूड़ा उठान का कार्य करती है। इसके अलावा नगर परिषद के पास कच्चे पक्के कर्मचारी मिलाकर करीब 205 कर्मचारी हैं। इनका मासिक वेतन करीब 36 लाख रुपये के करीब है।
नगर परिषद सफाई के लिए अन्य सामान व गाड़ियों को ठीक करवाने व उनमें पेट्रोल आदि डलवाने के लिए पांच लाख रुपये खर्च कर देती है। नगर परिषद ने वर्ष 2024 में भी सफाई व्यवस्था पर करीब दस करोड़ रुपए खर्च कर दिए थे।
शहर की सफाई पर इतने रुपये खर्च होने के बाद भी जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। शहर के शौचालय बदहाल हैं। इनमें लोगों का जाने को भी मन नहीं करता।
इंसेट
निरंतर पिछड़ रहा शहर-
धरातल पर सफाई व्यवस्था नजर नहीं आने के कारण हर वर्ष शहर स्वच्छता रैंकिंग पिछड़ रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में नाॅर्थ जोन में नारनौल 84वें पायदान पर रहा। वर्ष 2022 में नाॅर्थ जाेन में नारनौल की 54वीं रैंकिंग थी। इस प्रकार बीते वर्ष नारनौल 30 पायदान नीचे खिसक गया। स्वच्छता सर्वेक्षण किसी भी समय हो सकता है। इसकी तैयारी जोरों से चल रही है।
वर्जन-
शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर जितना पैसा खर्च हो रहा है, उसके हिसाब से सफाई हो रही है। इस बार सफाई व्यवस्था को और भी बेहतर करने के लिए नए साधन खरीदने की योजना भी है, जिससे काफी सुधार होगा।- प्रवीण कुमार, जेई नगर परिषद