नारनौल। बाजरे की खरीद प्रक्रिया शुरू हुए 8 दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हो सकी है। इस कारण बाजरा लेकर मंडी पहुंच रहे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों में सरकार के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश के कारण फसल खराब है तो सरकार मुआवजा दे और यदि फसल खराब नहीं है तो खरीद की जाए। किसानों ने बताया कि खरीद अधिकारी खरीद करने आते ही नहीं केवल सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक आते हैं। बाजरे का सैंपल लेते हैं और चले जाते हैं।
सैंपल रिपोर्ट भी किसानों को नहीं दी जाती और बाजरे की गुणवत्ता खराब बताकर खरीद नहीं की जा रही। सरकारी खरीद नहीं होने के कारण कुछ किसान अपना बाजरा व्यापारियों को बेच रहे हैं और कुछ जिनका व्यापारी भी नहीं खरीद रहे वें वापस लेकर जा रहे हैं।
नारनौल मंडी में अब तक करीब 1900 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है। इसमें से केवल 884 क्विंटल बाजरा व्यापारियों ने ही खरीदा है। अब तक नारनौल में 71, नांगल चौधरी में 13 और अटेली में 121 गेट पास जारी किए गए हैं। वहीं नारनौल में 1900, नांगल चौधरी में 373 और अटेली में 3216 सहित तीनों मंडियों में कुल 5489 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है। वहीं बारिश की आशंका के कारण किसान ढेरी टिनशेड के नीचे रख रहे हैं। इससे अभी तक नुकसान नहीं हुआ है।
दो दिन पहले बाजरा लेकर मंडी आया था। सरकारी खरीद नहीं होने पर व्यापारी को बेचा है। बाजरे की जांच करने के लिए केवल दो कर्मचारी आते हैं और सैंपल लेकर चले जाते हैं। -संजय, किसान, गांव बसीरपुर
मंगलवार को बाजरा लेकर मंडी पहुंचा था लेकिन पोर्टल पर डाटा अपडेट नहीं बताकर गेटपास जारी नहीं किया गया। इस कारण जे फार्म के तहत व्यापारियों को भी बाजरा नहीं बेच पा रहा।-मानसिंह, किसान, गांव धानौता
एक तरफ फसल खराबा का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। दूसरी ओर बारिश के कारण बाजरा खराब बताकर खरीदा नहीं जा रहा। सरकार से अपील है कि बाजरा खराब है तो उचित मुआवजा दिया जाए।- हिम्मत सिंह, किसान, गांव मोहनपुर
वर्जन :
सभी मंडियों में खरीद प्रक्रिया के दौरान बाजरे की जांच नियमित की जा रही है लेकिन अब तक जितने बाजरे की जांच की गई है, उनकी गुणवत्ता निर्धारित मापदंड के अनुरूप नहीं होने के कारण बाजरा नहीं खरीदा गया है।
प्रवीण भारद्वाज, जिला प्रबंधक, हैफेड, नारनौल।