नारनौल। प्रदेश के आरोही मॉडल स्कूलों के शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी गंभीर आर्थिक और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। तीन महीने से लंबित वेतन और वर्षों से अधूरी नियमितीकरण प्रक्रिया के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन कर्मचारियों ने सरकार से समाधान की गुहार लगाई है।
2011 में हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से आरोही मॉडल स्कूलों की शुरुआत की थी। इस पहल ने राज्य के हजारों विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराए हैं। हालांकि कर्मचारियों की समस्याओं के चलते अब इस प्रणाली को भी झटका लग रहा है। 285 से अधिक शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी तीन महीनों से वेतन के अभाव में हैं। नियमितीकरण प्रक्रिया भी लंबे समय से लंबित है, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित बना हुआ है। वहीं कई कर्मचारी दूरदराज के इलाकों में रहते हैं। वह परिवार की जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ हैं।
2012 में नियुक्त कर्मचारियों को पांच वर्षों की संतोषजनक सेवा के बाद नियमित करने का वादा किया गया था, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक अधूरी है। नियमितीकरण होने से कर्मचारियों को स्थायित्व मिलेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता में सुधार होगा। यह कदम न केवल कर्मचारियों बल्कि विद्यार्थियों और राज्य की शिक्षा प्रणाली के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगा।
इंसेट
ये हैं प्रमुख मांगें
-लंबित वेतन का तुरंत भुगतान किया जाए।
-नियमितीकरण प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए।
वर्जन:
विश्वास है कि सरकार समस्याओं को समझेगी और समाधान के लिए कदम उठाएगी।- मनोज कुमार अध्यक्ष, आरोही मॉडल स्कूल स्टाफ एसोसिएशन।