अभी नगर परिषद प्रधान के लिए होने वाले चुनाव की तिथि घोषित नहीं की गई है। यहां तक की पार्षदों ने शपथ तक नहीं ली है। मगर शहर में नप प्रधान पद के लिए लोगों में चर्चाओं का दौर गर्म है। प्रधान पद के लिए भी मुख्य रूप से तीन ही उम्मीदवार माने जा रहे हैं। इनमें तीनों ही भाजपा पार्टी के चेहरे नहीं हैं। वहीं अन्य संभावित उम्मीदवार भी भाजपा के चेहरे नहीं हैं। भाजपा के पास भी कोई ऐसा चेहरा नहीं है कि वह किसी पार्षद पर अपना दाव लगा सके। ऐसे में संभावना लगाई जा रही है कि प्रधान पद के लिए भाजपा को ही इनमें से किसी न किसी को प्रधान पद
हासिल करने के लिए अपना सारथी बनाना पड़ेगा।
इस बार नगर परिषद चेयरमैन ओबीसी से बनेगा। गत 22 मई को हुए नगर परिषद के 25 वार्डों के चुनाव में इस बार 09 सैनी, चार अनुसूचित जाति, चार यादव, 3-3 ब्राह्मण व वैश्य, एक जांगिड व एक सुनार चुनाव जीतकर आए हैं। ऐसे में मुख्य रूप से सैनी व अहीर के बीच से ही कोई प्रधान पद के लिए चुना जाना है, क्योंकि ओबीसी की अन्य जातियों जांगिड़ व सुनार एक-एक ही पार्षद हैं। इसलिए इनको अन्यों का समर्थन लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। अब इन अहीर व सैनी उम्मीदवार में से एक अहीर और दो सैनी उम्मीदवारों का नाम शहर में प्रधान पद के लिए ज्यादा चर्चाओं में बना हुआ है। जिन दो सैनी उम्मीदवार का नाम लिया जा रहा है, उनमें एक के पति पूर्व में हुए विधानसभा चुनाव में इनेलो के खुले में समर्थक रहे हैं। वहीं एक अन्य सैनी किरण चौधरी गुट के खासमखास माने जाते रहे हैं। वहीं चेयरमैनी के लिए दावेदारी जताने
वाले अहीर पार्षद भी पूर्व में कांग्रेसी रहे हैं।
तीनों ही गैर भाजपाई, कौन बनेगा सारथी
चेयरमैनी की दौड़ में शामिल इन तीनों में तीनों ही गैर भाजपाई के रूप में जाने जाते हैं। ऐसे में तीनों मुख्य दावेदार ही कांग्रेस या इनेलो समर्थित हैं। इसलिए भाजपा पार्टी के सामने ये काफी मुश्किल भरा रह सकता है।
भाजपा बना सकती है किसी को सारथीवहीं सूत्रों के हवाले से खबर यह भी आ रही है कि भाजपा के पास ओबीसी के पार्षद कम होने से वह किसी को अपना सारथी बना सकती है। ऐसे में कोई न कोई एक पार्षद अपनी पूर्व की पार्टी छोड़कर भाजपा में जा सकता है। इसकी तैयारियां भी जोर शोर से हो रही हैं। इसके लिए पार्टी व पार्षद दोनों ही तैयार हैं।
चलने लगा है जुगत बैठाने का खेल, धनबल का भी लेंगे सहारा
वहीं प्रधान पद के लिए अब जुगत बैठाने का खेल भी चल पड़ा है। सभी दावेदार अपने-अपने खेमे में अधिक से अधिक पार्षद लाने के लिए जी तोड़ मेहनत करने लगे हैं। जिसके चलते तीनों ही सक्रिय हो गए हैं तथा पार्षदों से लगातार संपर्क साधे हुए हैं। इनकी दिन रात पार्षदों के साथ बैठकें भी चल रही हैं। शहर में चर्चा है कि अपनी ओर पार्षद करने के लिए जल्द ही धनबल का खेल भी चलने वाला है।