नारनौल। प्रदेश में 5 अक्तूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव की रणभूमि में राजनीतिक दलों के व निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। वहीं चाय की दुकान पर, गांव की चौपाल पर, पार्क में सुबह घूमते हुए, फिर बाजार में काम करते हुए दुकानदार और दफ्तर में कार्य करने वाले कर्मचारी सब लोगों की जुबान पर चुनावी चर्चा है।
इस बार विधानसभा के चुनाव में रोमांचक मुकाबला बना हुआ है किसी भी प्रत्याशी की जीत एकतरफा नहीं है और प्रत्याशियों के बीच कड़ी टक्कर बनी हुई है। लोग चुनावी चर्चा में तो शामिल हो रहे हैं, लेकिन खुल कर समर्थन किसी का भी नहीं कर रहे। लोग मौजूदा सरकार और पिछली सरकार के दौरान हुए विकास कार्य की तुलना कर रहे हैं। वहीं बुजुर्ग लोग चुनावी चर्चा करते हुए पुराने दौर के चुनावों और किस्सों पर भी चर्चा कर रहे हैं। पिछले चुनावों के दौरान कुछ खास अनुभव भी चुनावी चर्चा में एक दूसरे से साझा कर रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में लोग योग्य उम्मीदवार का चुनाव करना चाहते हैं, जो क्षेत्र की आवाज को विधानसभा में उठा सके। चुनावी चर्चा पर लोगों से खास बातचीत।
मेरे गांव में सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था तो थी नहीं साथ ही पीने के लिए पानी का इंतजाम भी बहुत मुश्किल से होता था। खेती सिर्फ वर्षा पर निर्भर थी और घाटे का सौदा बनकर रह गई थी। पिछले कुछ वर्षों में हमारे गांव तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचा है। अब लोग रबी और खरीफ की मौसमी फसल के साथ-साथ सब्जी भी उगा रहे हैं। इस बार ऐसे उम्मीदवार का चुनाव करना चाहूंगा जो शिक्षित, योग्य और विकास करवाने वाला हो ताकि क्षेत्र में खुशहाली आ सके।
राजेंद्र सिंह, नेहरू नगर, नांगल चौधरी।
क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या बहुत बड़े पैमाने पर बनी हुई है, सरकारी भर्तियां निकाली नहीं जाती और जो निकाली जा रही है उनमें से अधिकतर रद्द हो जाती है। सरकारी विभाग में पद खाली पड़े हैं, लेकिन किसी भी दल की सरकार हो सीधी भर्ती नहीं करती और अलग-अलग योजनाओं के नाम से कच्ची नौकरियों पर युवाओं को रखा जाता है। इसलिए मैं आगामी विधानसभा चुनाव में ऐसी सरकार का चुनाव करना चाहूंगा जो सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों पर भर्तियां निकाले ताकि प्रदेश का प्रतिभाशाली युवा अपनी योग्यता अनुसार रोजगार प्राप्त कर सकें।
रघुवीर गिरी, गांव दंचोली, नांगल चौधरी।
पुराने समय में चुनाव के दौरान गांव और शहर में जो माहौल होता था आज के समय में वह माहौल बन नहीं पाता। पहले नेता ज्यादा शिक्षित नहीं होते थे लेकिन वो आम लोगों के बीच के होते थे, ऐसे कई किस्से गांवों में मिल जाएंगे जब प्रदेश और क्षेत्र के दिग्गज नेता गांवों में खेतों में लोगों के साथ खाना खाते थे। पुराने समय में आम लोगों के बीच में से निकल कर नेता बनते थे वो असहाय और पीड़ित लोगों की आवाज बनते थे। वहीं आज के समय में नेता बनते नहीं बल्कि बनाए जाते हैं।
प्रमोद कुमार, मोहल्ला भाटवाडा, नारनौल।
आज के समय में महंगाई लगातार बढ़ रही है, आम आदमी के लिए साधारण जीवन यापन करते हुए भी घर चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर निजी स्कूलों की तुलना में काफी नीचे हैं। निजी स्कूलों की मनमानी के चलते लोगों की आमदनी का बड़ा हिस्सा बच्चों को पढ़ाने में खर्च हो रहा है। इसलिए आगामी विधानसभा चुनाव में मैं ऐसी सरकार का चुनाव करना चाहूंगा जो महंगाई को बढ़ने से रोकें और सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाए।
लालचंद सैनी, मोहल्ला सराय ढुसरान, नारनौल।
फोटो- 17लालचंद सैनी।
फोटो- 17लालचंद सैनी।
फोटो- 17लालचंद सैनी।
फोटो- 17लालचंद सैनी।