ई-उपचार साफ्टवेयर शुरू होते ही जहां सिविल अस्पताल पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगा वहीं मरीजों को पर्ची, कागजों के अलावा अन्य रिकार्ड संभालने के झंझट से निजात मिल जाएगी। इस सिस्टम के लागू होने से अस्पताल के काम में पारदर्शिता आएगी और पेपर वर्क भी कम हो जाएगा। इस सिस्टम के तहत डॉक्टरों, अस्पताल का रिकार्ड, भवनों का मेंटिनेंस से लेकर मरीज का पिछला रिकार्ड भी ऑनलाइन रहेगा। इस सिस्टम को शुरू होने में करीब तीन महीने का समय लग जाएगा।
सरकार ने यह काम हास्पिटल मैनेजमेंट इनफोरमेशन सिस्टम (एचएमआईएस) कंपनी को दिया है। कंपनी पूरे सिस्टम के बारे में अस्पताल के समस्त स्टाफ को उक्त सॉफ्टवेयर के बारे में प्रशिक्षण देगी। महेंद्रगढ़ उपस्वास्थ्य केंद्र पर इसका काम शुरू हो गया है। स्टाफ को पहले बेसिक कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाएगी और बाद में ई-उपचार सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग दी जाएगी। स्टाफ को तीन महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी। उसके बाद कंप्यूटर पर काम शुरू कर दिया जाएगा। विभाग के द्वारा रजिस्ट्रेशन, ओपीडी, आईपीडी, फार्मेसी, लैब, एक्सरे और नर्सिंग का काम आनलाइन किया जा रहा है।
मरीजों का रिकार्ड होगा ऑनलाइन
ई-उपचार सॉफ्टवेयर के माध्यम से मरीजों का पूरा रिकार्ड ऑनलाइन होगा। रिकार्ड ऑनलाइन होने से मरीज को भविष्य में अपनी बीमारी का कोई भी दस्तावेज ले जाने की जरूरत नहीं है। मरीजों को प्रथम बार रजिस्ट्रेशन के दौरान 12 या 14 नंबर का यूनिक हेल्थ (यूएच आईडी) दिया जाएगा। इस रजिस्ट्रेशन से आप अपनी बीमारी का पूरा रिकार्ड देख सकेंगे। प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज करवा सकेंगे। रिकार्ड में देखने से यह स्पष्ट हो जाएगा कि आप पहले किस बीमारी से पीड़ित थे, उस दौरान कौन सी दवाइयां दी गई थीं। कितने समय इलाज चला था। इसके अलावा किस अस्पताल से कौन से चिकित्सक ने दवाइयां दी थीं।
काम में आएगी पारदर्शिता
ई-उपचार सॉफ्टवेयर शुरू होने से अस्पताल के काम में पारदर्शिता आएगी। सरकारी दवाइयां से लेकर अस्पताल का मेंटीनेंस सब रिकार्ड अब आन लाइन होगा। हर रोज कितनी ओपीडी हो रही है। मरीजों को रोग से संबंधित दवाइयां दी जा रही हैं नहीं। दिन में मरीजों को कितनी दवाइयां ड्रग स्टोर से दी गई हैं। अस्पताल में चिकित्सक हर रोज कितने मरीजों को चेक कर रहे हैं। कितने समय में चेक कर रहे हैं। इसके अलावा चिकित्सक बाहर की कौन सी दवाइयां लिख रहे हैं। साथ ही यह भी पता चलेगा कि स्टाफ का कौन व्यक्ति कितना काम कर रहा है।
मरीजों की होगी केयर
साफ्टवेयर शुरू होने से मरीजों की केयर होगी साथ ही उनकी हालत में भी सुधार होगा। आईपीडी मरीज के लिए चिकित्सकों द्वारा समय-समय पर दी जाने वाली दवाइयों की स्टॉफ नर्स को ऑन लाइन इंट्री करनी होगी। किस समय कौन सी दवाई दी गई। इससे मरीजों की केयर बढ़ेगी और हालत में जल्द सुधार होगा।
इनको दी जा रही है ट्रेनिंग
विभाग द्वारा हाईटेक होने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए न केवल साफ्टवेयर लांच किया गया है बल्कि इसके लिए स्टाफ को भी ट्रेंड किया जा रहा है। साफ्टवेयर पर काम करने के लिए विभाग द्वारा डॉक्टर, नर्स, स्टाफ नर्स, लैब टैक्निशियन, एएनएम, जीएनएम व फार्मासिस्ट सहित पूरे स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा रही है। विभाग यह कार्यक्रम करीब तीन महीने तक जारी रखेगा। पूरे स्टाफ को इस साफ्टवेयर पर काम करने की पूरी ट्रेनिंग दी जाएगी।