महेंद्रगढ़। शहर के मोदाश्रम के पास 1.60 करोड़ रुपये की लागत से बने डंपिंग यार्ड में लगा कचरा निस्तार केंद्र बिजली कनेक्शन के अभाव में ठप पड़ा है। प्रतिदिन शहर से निकलने वाला औसतन 40 टन कचरे का पहाड़ तीन सालों से निस्तारण का इंतजार कर रहा है।
अब करीब पांच एकड़ में बनाए गए इस डंपिंग यार्ड में कचरा डालने तक की जगह नहीं है। उधर नवंबर के दौरान ही 4.22 करोड़ रुपये का डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का टेंडर अलॉट होने के बावजूद भी कचरे काम शुरू नहीं हो सका है जिसके कारण शहर में सफाई व्यवस्था भी गड़बड़ा रही है।
तीन वर्षों से घर-घर कूड़ा एकत्रित करके डंपिंग यार्ड में तो पहुंचाया लेकिन नपा के जिम्मेदारों ने इसे शुरू करने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई। डंपिंग स्टेशन के नजदीक निस्तारण के लिए एमआरएफ (मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर स्थापित किया जाना था।
यहां रिसाइकिल होने योग्य कचरे को अलग-अलग छांटकर प्लास्टिक, गत्ता और अन्य सामग्री को पुन: उपयोग के लायक बनाने के लिए गुरुग्राम भेजा जाना प्रस्तावित था। हालांकि यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई और एमआरएफ सेंटर अब तक शुरू नहीं हो सका।
लगभग 50 हजार की आबादी वाले महेंद्रगढ़ शहर में प्रतिदिन औसतन करीब 40 टन कूड़ा निकलता है। यह आबादी 15 वार्डों के अलावा अविकसित कॉलोनियों और स्टेट हाईवे के किनारे बने आवासों में फैली हुई है।
नपा का दावा जल्द शुरू होगा निस्तारण
नपा के अधिकारियों का दावा है कि शहर के मोदाश्रम के नजदीक बने डंपिंग प्वाइंट पर एकत्र कूड़े के निस्तारण के लिए जिस कंपनी को यह टेंडर मिला है, उसकी तरफ से वहां प्लांट लगाने की प्रक्रिया जनवरी में ही शुरू कर दी गई है। हालांकि इस निस्तारण केंद्र पर कंपनी की ओर से उपकरण स्थापित कर दिए गए हैं लेकिन अब बिजली कनेक्शन के अभाव में यह शुरू नहीं हो सका है।
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मोदाश्रम के नजदीक बने डंपिंग प्वाइंट का जायजा लिया गया है। शहर के वर्षों से इकट्ठे कूड़े के ढेर को पूरी तरह से खत्म करने के लिए टेंडर किया जा चुका है। बिजली कनेक्शन के लिए प्रक्रिया जल्द पूरी कर इस निस्तारण केंद्र को शुरू कराया जाएगा। -रमेश सैनी, चेयरमैन नगर पालिका महेंद्रगढ़
फोटो संख्या:58- कचरा निस्तारण के लिए यार्ड पहुंचे उपकरण--संवाद