कनीना। लगातार बढ़ती सब्जियों की कीमताें के कारण दो सप्ताह पूर्व जो सब्जियां महज सौ रुपये में झोला भरकर आती थी अब वह थैली में ही सिमट गई है। टमाटर के दामों में दाेगुना उछाल आने से यह आमजन की थाली से गायब हो गया है। वहीं मसालों के रूप में प्रयोग किए जाने वाले लहसुन की कीमतें लंबे समय से 300 पार चल रही हैं, जबकि इस बार आलू भी 40 रुपये से अधिक चल रहा है। व्यापारियों की मानें तो बारिश के मौसम में दूर दराज की मंडियों से आवक काफी प्रभावित हो रही है। इसके कारण लगातार सब्जियों के दामों में वृद्धि हो रही है।
स्थानीय सब्जियां मांग के अनुसार पर्याप्त नहीं
हालांकि महेंद्रगढ़ जिले में बड़े स्तर पर सब्जियों की खेती की जाती है, लेकिन आबादी की मांग के अनुसार दिल्ली व जयपुर सहित प्रदेश की अन्य मंडियों से आपूर्ति होती है। स्थानीय टमाटर अप्रैल से मई माह तक ही उपलब्ध हो पाता है। टमाटर की आपूर्ति बाहर से ही होती है। वहीं प्याज व आलू भी स्थानीय स्तर पर होते हैं, लेकिन स्टॉक के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण फरवरी से अप्रैल माह तक ही उपलब्ध हो पाते हैं, जो कीमतें बढ़ने का मुख्य कारण हैं।
लोग बोले सब्जियों की महंगाई से बिगड़ा बजट
क्षेत्र निवासी राजेश शर्मा, गौरव भारद्वाज, कमलेश शर्मा, सुरेंद्र कुमार, दीनदयाल, राजेंद्र प्रसाद, रामनिवास का कहना है कि महंगाई के कारण बजट बिगड़ गया है। आलू प्याज जैसे 12 माह चलने वाली सब्जी भी इस बार 40-50 रुपये से नीचे नहीं आ रही हैं, जबकि मटर, लहसुन, अदरक के दामों में लगातार वृद्धि हो रही है।
दो सप्ताह पहले से अब दोगुने हो गए हैं दाम
सब्जी कीमत पहले कीमत अब
टमाटर 40 रुपये 80 रुपये
प्याज 40 रुपये 50 रुपये
आलू 25 रुपये 40 रुपये
बैंगन 20 रुपये 30 रुपये
पेठा 15 रुपये 20 रुपये
कैरी 20 रुपये 30 रुपये
भिंडी 30 रुपये 40 रुपये
घीया 20 रुपये 30 रुपये
पालक 25 रुपये 50 रुपये
बारिश के सीजन में मांग के अनुसार मंडियों में सब्जी की आपूर्ति नहीं होने से लगातार कीमतों में उछाल आ रहा है। महंगी हुई सब्जियों के कारण मंडी में ग्राहक भी काफी कम आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर विशेषकर सर्दी के मौसम में काफी सब्जियां उपलब्ध होती हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में इस क्षेत्र में काफी कम सब्जियां ही उपलब्ध हो पाती हैं। इसके कारण दामों में वृद्धि हो रही है।
सुरेश शर्मा कोटिया, सब्जी के थोक विक्रेता