कनीना। एक्सपायर्ड और अनुपयोगी दवाओं को लापरवाही से फेंकना पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। औषधि विज्ञान विभाग एवं पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक सेवा समिति के निदेशक कुनाल मावता ने लोगों से अपील की है कि वे दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार करें और एक्सपायर्ड दवाओं का सुरक्षित तरीके से निपटान करें।
कुनाल मावता ने बताया कि कई लोग पुरानी या एक्सपायर्ड दवाओं को कूड़ेदान, नालियों या शौचालय में फेंक देते हैं। इससे दवाओं के रासायनिक तत्व मिट्टी और जल स्रोतों में पहुंचकर प्रदूषण फैलाते हैं। इसका असर केवल इंसानों पर ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों और अन्य जीवों पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से एंटीबायोटिक दवाओं का गलत उपयोग और अनुचित निपटान एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) जैसी गंभीर समस्या को बढ़ा रहा है। यदि समय रहते लोग जागरूक नहीं हुए तो भविष्य में सामान्य संक्रमणों का इलाज भी मुश्किल हो सकता है। उन्होंने नागरिकों से दवाओं का जिम्मेदारी से उपयोग करने और एक्सपायर्ड दवाओं का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने की अपील की।