नारनौल। जिले में इन दिनों कुत्ते व बंदरों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 8 से 10 लोग कुत्ते व बंदरों के काटने के बाद अस्पतालों में रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें कुछ मामले बिल्ली के काटने के भी सामने आए हैं।
जनवरी से लेकर सितंबर तक 2367 लोगों ने नागरिक अस्पताल में पहुंचकर रेबीज का टीका लगवाया है। अगर समय रहते रेबीज का टीका नहीं लगवाया जाता है तो जान पर भी आफत बन आती है। क्योंकि रेबीज एक घातक वायरस है, जो संक्रमित कुत्तों या जानवरों की लार में मौजूद होता है। ऐसे में कुत्ते, बंदर व बिल्ली सहित अन्य जानवरों के काटने को हल्के में नहीं लेना चाहिए। विश्व रेबीज दिवस प्रति वर्ष 28 सितंबर को मनाया जाता है, ताकि लोगों को रेबीज की रोकथाम के बारे में जागरूक किया जा सके।
यह हैं मुख्य लक्षण
चिकित्सकों ने बताया कि कुत्ते व बिल्ली के काटने से मरीज को पानी से डर लगना व अनिद्रा की समस्या हो जाती है। वहीं सिर दर्द, घबराहट, बेचैनी, चिंता और व्याकुल रहना, भ्रम की स्थिति में रहना, बहुत अधिक लार निकला रेबीज के लक्षण है।
ऐसे करें बचाव
चिकित्सकों का कहना है कि जानवर के काटने पर तुरंत उसे पानी या साबुन से अच्छी तरफ धोना चाहिए। इसके बाद नजदीकी अस्पताल में रेबीज का टीका लगवाना चाहिए ताकि समय रहते बचाव किया जा सके।
नागरिक अस्पताल नारनौल में लगे टीके
माह मरीज
जनवरी 286
फरवरी 248
मार्च 345
अप्रैल 312
मई 333
जून 248
जुलाई 234
अगस्त 211
सितंबर में अब तक 150
कुत्ता, बिल्ली या फिर बंदर के काटने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। उस घाव को पानी से अच्छी तरह से साफ करे। वहीं अस्पताल में रेबीज का टीका लगवाएं ताकि किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
डॉ. कंवर सिंह, वरिष्ठ चिकित्सक नागरिक अस्पताल नारनौल।