नारनौल। खुद को साबित करने के लिए महज 17 साल की उम्र दिव्या सैनी में जूडो सीखने के लिए मैदान में उतरी। कड़ी मेहनत करते हुए दिव्या ने तीन साल मे स्टेट लेवल की दो प्रतियोगिताओं में हिस्सा भी और वहां प्रतिद्वंदी को पटखनी देते हुए दो सिल्वर मैडल अपनी झोली में डाले।
बता दें कि 29 जून 2005 को मोहल्ला पीरआगा में एक साधारण से परिवार में जन्मी दिव्या सैनी के पिता सब्जी बेचते हैं और मां गृहणी हैं। दिव्या दो भाइयों की इकलौती बहन है और स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा है।
दिव्या जब 15 साल की थी तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में अपने पापा के साथ जूडो की कोई प्रतियोगिता देखने के लिए गई थी। इसी दौरान उसने ठान लिया कि उसे भी जूडो सीखना है और अपने दम पर अपनी ऐ अलग पहचान बनानी है।
2022 में जब दिव्या 17 साल की थी, तब उसने पहली बार स्टेडियम में जूडो सीखने के लिए प्रवेश किया। कोच के मार्गदर्शन और अपनी कड़ी मेहनत व एकाग्रता के बल पर दिव्या ने सितंबर 2025 में पंचकुला में आयोजित स्टेट लेवल की खेल महाकुंभ और 2025 नवंबर में भिावनी में हुई प्रदेश स्तरीय सांसद खेल महोत्सव प्रतियोगिताओं में दो सिल्वर मैडल अपने नाम किए।
ओलंपियन गरिमा चौधरी को मानती है रोल मॉडल
दिव्या यूपी के मेरठ शहर की जूडो खिलाड़ी गरिमा चौधरी को अपना रोल मॉडल मानती है। दिव्या ने बताया कि 2012 लंदन ओलंपिक में जूडो की एकमात्र महिला खिलाड़ी थी जिसने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। दिव्या ने बताया कि हालांकि गरिमा देश को सोना नहीं दिला सकी लेकिन वो ये सफर जरूर तय करेगी।
वर्जन:
दिव्या अनुशासन में रहकर कड़ी मेहनत करने वाली एक बेहतरीन खिलाड़ी है। उसका सपना देश को गोल्ड दिलाना है और मेहनत व लगन से अभ्यास करती रही तो अपने लक्ष्य तक पहुंच जाएगी। फिलहाल दिव्या ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता की तैयारी में जुटी हुई है।-विक्की, जूडो कोच, सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम, नारनौल