जिला अस्पताल में महिला डॉक्टरों की कमी के कारण महिला मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे में ओपीडी में गर्भवती के साथ सामान्य मरीजों को एक ही डॉक्टर देख रहा है। गायनी वार्ड में भी मरीजों की संख्या अधिक होने पर डॉक्टरों पर दबाव होता है। अस्पताल में दो ही डॉक्टर स्थाई रुप से हैं। इसके अलावा अन्य निजी व डेपुटेशन के डॉक्टरों के सहारे काम चलाया जा रहा है।
जिला अस्पताल में दो दर्जन से अधिक गर्भवती महिलाओं के अलावा अन्य महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। लेकिन, महिला डॉक्टरों की कमी से उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। जिला अस्पताल पर जिले के साथ राजस्थान से भी काफी मरीज उपचार के लिए आते हैं। इससे ओडीपी के साथ गायनी वार्ड भी महिला मरीजों की संख्या काफी रहती हैं। नारनौल जिला मुख्यालय 100 से 200 बिस्तरों का अस्पताल होने के बाद भी जरूरी संसाधनों में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। लिहाजा इसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ा रहा है। जिला अस्पताल में नियमित रुप से दो एमबीबीएस महिला डॉक्टर हैं। जो केवल मरीजों को देख सकती लेकिन ऑपरेशन नहीं कर सकती। दूसरी ओर जिला सामान्य अस्पताल में मरीजों को दूसरी सुविधा मुहैया कराने के लिए फिल्ड से चार महिला डॉक्टरों को डेपुटेशन पर जिला अस्पताल में लगाया गया है। जिला अस्तपाल के एमएस डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि दो महिला डॉक्टर अस्पताल में नियमित रुप से कार्यरत है। इसके बाद चार महिला डॉक्टरों को अन्य केंद्रों से डेपुटेशन पर लगाया गया है। इसके लिए इमरजेंसी सेवाओं के लिए पांच निजी महिला डॉक्टरों की सेवाएं ली जा रही है। जिससे सिजेरियन केस में दिक्कतें न आए। उन्होंने बताया कि फिलहाल गर्भवती महिलाओं को जरूरत के अनुसार गायनी वार्ड में दिखाने की सुविधा उपलब्ध है।
गायनी वार्ड में एक बेड पर दो जच्चा-बच्चा
सरकारी अस्पताल के गायनी वार्ड में इन दिनों गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बेड की कमी के कारण एक-एक बेड में दो जच्चा-बच्चा को रखना पड़ा है। लोगों का कहना है कि वार्ड में बेडों की संख्या बढ़ानी चाहिए। वीरवार को सिविल अस्पताल में सभी बेड पर दो-दो महिलाएं थी। एक महिला ने बताया कि एक बेड पर दो जच्चा-बच्चा हैं। इसलिए करवट तक नहीं बदल पाते हैं व गिरने का भी डर रहता है। बच्चे को संभालें या खुद को। इस पर अस्पताल प्रशासन को देखना चाहिए व बेडों की संख्या बढ़ानी चाहिए। बता दें कि आठ जनवरी को गायनी वार्ड में 22 डिलिवरी के केस हुए थे। इसके अलावा गंभीर मामलों को भी वार्ड में रखा गया है। इसके अलावा अन्य केस भी होते है। अस्पताल में पिछले साल जनवरी में 365, फरवरी में 371, मार्च में 431, अप्रैल में 319, मई में 399,जून 384, जुलाई 501, अगस्त 573,सितंबर में 638, अक्तूबर 599 व नवंबर 522 डिलिवरी केस हुए थे।
अस्पताल में दो एमबीबीए महिला डॉक्टर पहले से है। एनएचएम के एक स्त्री रोग विशेषज्ञ समेत दो और डॉक्टर मिले हैं। इसके साथ ही चार पीएचसी/सीएचसी से डॉक्टरों को डेपुटेशन पर लगाया गया है। इसके साथ ही पांच निजी अस्पतालों के विशेषज्ञों की जरूरत के अनुसार सेवाएं ली जा रही है। गायनी वार्ड में बेडों की संख्या बढ़ाने की योजना है।
- डॉ. राजेश कुमार, एमएस जीएच नारनौल