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Mahendragarh-Narnaul News: अनुवाद के वर्तमान और भविष्य को लेकर हुई चर्चा

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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार और सम-कुलपति प्रो. सुषमा यादव के संरक्षण में अनुवाद की महत्ता और भविष्य में अनुवाद की संभावनाओं को प्रतिपादित करने के लिए दो दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के पहले दिन ज्ञान अनुशासन के रूप अनुवाद की वर्तमान स्थिति और भविष्य तथा दूसरे दिन अनुवाद पारिस्थितिकी भारतीय परिदृश्य विषय पर प्रो. हनुमान प्रसाद शुक्ला ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।
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हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीरपाल सिंह यादव ने पहले दिन स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया जबकि दूसरे दिन स्वागत भाषण सह आचार्य डॉ. कामराज सिंधु ने दिया। प्रो. हनुमान प्रसाद शुक्ला ने अनुवाद को एक स्वायत्त एवं स्वतंत्र विद्याशाखा के रूप में प्रतिस्थापित करते हुए उन परिदृश्यों और परिस्थितियों की चर्चा की। उन्होंने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुवाद की व्याप्ति स्वीकारते हुए उसकी उपयोगिता सिद्ध की। मशीनी अनुवाद को अनुवाद के लिए चुनौती माना। भारत में अनुवाद की पारिस्थितिकी को सुधारने के लिए उन्होंने दक्षता विकास, बहुभाषा ज्ञान, कंप्यूटर एप्लीकेशंस का ज्ञान एवं प्रोग्राम भाषा के ज्ञान को आवश्यक माना।
विशेषज्ञ वक्ता ने कहा कि आने वाला समय अनुवादकों और भाषाविदों का है। विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रश्नों के लिए आमंत्रित किया गया, जिसमें पाठ्यक्रम संबंधी जानकारी और उच्च शिक्षा के रूप में नेट की परीक्षा और अनुवाद से उत्पन्न होने वाले रोजगार की बात पर भी गहन चर्चा हुई। अनुवाद के कारण क्या मूल पाठ में हास हो सकता है। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. बीरपाल सिंह यादव ने व्याख्यान की उपयोगिता स्पष्ट की एवं औपचारिक समापन और धन्यवाद ज्ञापन के लिए विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रीना स्वामी को आमंत्रित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी शिक्षकों डॉ. कमलेश कुमारी, डॉ. कामराज सिंधु, डॉ. अरविंद सिंह तेजावत, डॉ. सिद्धार्थ शंकर राय, डॉ. अमित कुमार, विभाग के सभी शोधार्थी और विद्यार्थियों की सहभागिता रही।
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