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टूटे नालों के सहारे कैसे रुकेगी बाढ़

Thu, 09 Jun 2016 11:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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गंदगी सं अटे नाले - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बरसात का मौसम आने वाला है। मानसून केरल में दस्तक दे चुका है। ऐसे में प्रशासन भी लोगों को बाढ़ और पानी भरने की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रबंध करने लग जाता है, मगर शहर में अभी इस प्रकार की कोई तैयारी नहीं हुई हैं। इसके कारण लोगों में बाढ़ और पानी भर जाने का डर बना हुआ है। शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए मुख्य रूप से एक बड़ा गंदा नाला बनाया हुआ है। मगर वह अब कई जगह से टूट गया है। इसके निर्माण के बाद से इसकी एक या दो बार ही फौरी तौर पर मरम्मत हुई है। वहीं यह गंदगी से भी अटा पड़ा है। हालांकि नप ने इसकी सफाई करना शुरू तो किया है, मगर अभी भी इसकी पूरी तरह सफाई नहीं की गई है। ऐसे में कहीं ये बड़ा गंदा नाला स्वयं बाढ़ लाने में भी सहायक बन सकता है।
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बरसाती और शहर के गंदे पानी की निकासी के लिए शहर के बीचोंबीच करीब 19 वर्ष पूर्व गंदे नाले का निर्माण किया गया था। इससे पूर्व यहां पर छलक नदी बहती थी। इस पर लोगों ने अतिक्रमण भी कर लिया था। 1996 में शहर में आई बाढ़ के बाद नगर परिषद द्वारा इस नाले का निर्माण कराया गया था। इस नाले के निर्माण के समय छलक नदी के बीच बने मकानों को भी भारी संख्या में हटाया गया था।

ढाई से तीन किलोमीटर लंबा है नाला
करीब ढाई से तीन किलोमीटर लंबा यह नाला शहर के पश्चिम में निजामपुर रोड के पास  मोहल्ला सलामपुरा से शुरू होकर मोहल्ला महल, मिश्रवाड़ा, गस्तीवाड़ा, पुल  बाजार, चांदुवाड़ा, शनि मंदिर, रामानंद राधेश्याम धर्मशाला, पुलिस लाइन व  गौशाला रोड के साथ से होता हुआ रेवाड़ी रोड पर कैलाश नगर में जाकर समाप्त  होता है। उस समय नाले के निर्माण पर करीब 15 लाख रुपये का खर्चा आया था।
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नाला ही बन गया था बाढ़ लाने में सहायक
नाले के निर्माण के बाद इसकी सफाई नहीं होने से तथा जगह-जगह से टूट जाने के  कारण यह नाला ही बाढ़ लाने में सहायक हो गया था। निर्माण के दो साल बाद ही  1998 में नाले के हुए रिसाव से बाढ़ आ गई। वहीं 2005 व 2008 में भी इसकी  वजह से इसके आसपास के मोहल्लों रविदास मंदिर मार्ग, जमालपुर, पुरानी सराय,  दशमेश नगर, मीराजी व चांदुवाड़ा में बाढ़ आ गई थी। जिसके कारण यहां के  वासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था।

निर्माण के बाद चार-पांच बार ही हुई है नाले की सफाई
नाले के निर्माण के बाद नगर परिषद ने इसकी सफाई की ओर कोई विशेष ध्यान नहीं  दिया। जिसके कारण इसमें गंदगी के ढेर अटे पड़े हैं। नाले के अंदर जगह-जगह  पर थैलियां इकट्ठा हुई हैं। वहीं नाले के अंदर अनेक जगहों पर घास व झाडिय़ां  भी उग आई हैं। अपने निर्माण के बाद इस नाले की सफाई मुश्किल से चार या पांच  बार ही हुई है। जिसके कारण नाले से उठने वाली बदबू से इसके आसपास रहने  वाले लोगों का बुरा हाल है।

सीवर निर्माण के समय कई जगह से टूट गया था नाला
शहर में करीब तीन साल पूर्व डाली गई बड़ी सीवर लाइन भी नाले के अंदर से ही डाली गई है। इसके कारण यह नाला मोहल्ला महल, रविदास मंदिर के पास, पुल  बाजार के पास, रामानंद राधेश्याम धर्मशाला के पास व गौशाला रोड पर रेवाड़ी रोड तक पूर्णतय यह नाला टूट गया था। जिसके बाद इस नाले की मरम्मत के लिए नगर परिषद ने दो बार 18 लाख रुपये का टेंडर भी छोड़ा, मगर दोनों ही बार ठेकेदार सरेंडर कर गए थे। इसके कारण सीवर के निर्माण के तीन साल बाद  भी इसकी मरम्मत का कार्य नहीं हो पाया है।

शनि मंदिर के पास कुछ दिन पहले गिर गया था ट्रक
शनि मंदिर के पास गंदे नाले में करीब पांच माह पूर्व एक ट्रांसपोर्ट का ट्रक गिर गया था। इसके बाद यहां पर नाले की करीब 20 फुट दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस क्षतिग्रस्त दिवार को भी अभी तक ठीक नहीं किया गया है। तेज पानी आने से यह दीवार ज्यादा टूट सकती है।
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