रेवाड़ी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास गुप्ता की अदालत ने बिजली चोरी से जुड़े मामले में डीएचबीवीएन की अपील मंजूर करते हुए निचली अदालत का फैसला खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिजली अधिनियम के तहत बिजली चोरी के मामलों में दीवानी अदालत का अधिकार क्षेत्र नहीं है।
मामला गांव रोजका की ढाणी निवासी अशोक कुमार के बिजली कनेक्शन से जुड़ा है। बिजली निगम की टीम ने 9 दिसंबर 2021 को परिसर की जांच के दौरान सीधे बिजली आपूर्ति किए जाने का आरोप लगाया था। इसके बाद 50,389 रुपये आकलन शुल्क और 8,000 रुपये समझौता शुल्क की मांग की गई। अशोक कुमार ने आरोपों को गलत बताते हुए दीवानी अदालत में वाद दायर किया था।
23 अगस्त 2024 को निचली अदालत ने अशोक कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके खिलाफ बिजली निगम ने अतिरिक्त जिला न्यायालय में अपील दायर की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बिजली अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत बिजली चोरी के मामलों में दीवानी अदालत का अधिकार क्षेत्र बाधित है। अदालत ने यह भी पाया कि बिजली चोरी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने निगम की अपील स्वीकार कर निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया और अशोक कुमार का वाद अधिकार क्षेत्र के आधार पर लागत सहित खारिज कर दिया। हालांकि, उन्हें सक्षम मंच के समक्ष कानून के अनुसार उपाय अपनाने की छूट दी गई है। निचली अदालत के आदेश पर जमा राशि नियमानुसार लौटाने या आगामी बिजली बिलों में समायोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।